यूपी बीजेपी में घमासान: कानपुर देहात से लखनऊ तक पहुंची गुटबाजी, पूर्व सांसद वारसी को नोटिस
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (UP BJP) की कानपुर देहात इकाई में छिड़ी गुटबाजी अब लखनऊ तक गूंज रही है। इस विवाद के केंद्र में हैं—राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला के पति व पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी और वर्तमान सांसद देवेंद्र सिंह भोले। लंबे समय से चली आ रही तनातनी अब संगठन स्तर पर खुलकर सामने आ गई है।
गुरुवार को पार्टी संगठन ने बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। आरोप है कि उनका आचरण पार्टी की विचारधारा के विपरीत है। संगठन ने उनसे सात दिन के भीतर जवाब मांगा है, साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जवाब संतोषजनक न हुआ तो कार्रवाई की जाएगी।
वारसी ने भेजा 12 लोगों को कानूनी नोटिस
विवाद यहीं तक सीमित नहीं रहा। एक दिन पहले वारसी ने पलटवार करते हुए पार्टी के 12 पूर्व पदाधिकारियों को कानूनी नोटिस भेज दिया। इनमें पूर्व जिलाध्यक्ष, पूर्व प्रभारी और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हैं। वारसी ने इन सभी से अपने अधिवक्ता के माध्यम से लगाए गए आरोपों के प्रमाण मांगे हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर सबूत नहीं दिए गए तो वे मुकदमा दर्ज कराएंगे।
नोटिस भेजे जाने वालों में पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज शुक्ला, राजेश तिवारी, पूर्व प्रभारी सतीश शुक्ला, विद्यासागर त्रिपाठी मूसानगर, अवधेश कुमार शुक्ला चेयरमैन, अर्चना मिश्रा, ज्ञानेश अग्निहोत्री शेरू, रामविलास मिश्रा, ब्रजेंद्र सिंह, सुनील शर्मा, मोनू मिश्रा और मोहित अवस्थी चारू के नाम शामिल हैं। पूर्व जिलाध्यक्षों ने हाल ही में खुलेआम पार्टी के मंत्रियों और विधायकों पर टिप्पणी की थी। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह और क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल को भी पत्र लिखकर इन नेताओं पर कार्रवाई की मांग की गई है।
चुनाव से पहले ही बढ़ी थी खींचतान
दरअसल, लोकसभा चुनाव से पहले ही वारसी और भोले के बीच खींचतान तेज हो गई थी। 22 जुलाई को अकबरपुर कोतवाली में राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने धरना दिया था। इस दौरान उनके पति वारसी ने सांसद भोले पर ब्राह्मणों के उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इतना ही नहीं, वारसी ने डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक पर भी फोन पर ब्राह्मण समाज की अनदेखी करने का आरोप जड़ा था।
अब संगठन की कार्रवाई और वारसी के पलटवार से कानपुर देहात बीजेपी की अंदरूनी लड़ाई और खुलकर सामने आ गई है, जिसका असर लखनऊ तक महसूस किया जा रहा है।
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