Sitapur News: महसोनिया गांव में बाघ की दस्तक, ग्रामीणों में दहशत का माहौल

Sandesh Wahak Digital Desk: सीतापुर के मिश्रिख वन रेंज क्षेत्र के गांवों में इन दिनों ‘जंगल के राजा’ की दहशत फैली हुई है। पिछले कुछ दिनों में कई गांवों में बाघ दिखने और मवेशियों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे ग्रामीण दिन-रात खौफ के साए में जी रहे हैं।

हाल ही में, 1 सितंबर को महसोनिया गांव के किसान रामकिशोर शुक्ला जब खेत में घास काट रहे थे, तो उन्हें एक बाघ और उसके दो शावक दिखाई दिए। वे तुरंत भागकर गांव पहुंचे और ग्रामीणों के साथ-साथ वन विभाग को भी फोन पर इसकी सूचना दी। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर गन्ने के खेतों में कॉम्बिंग की, लेकिन बाघ का कोई सुराग नहीं मिला। वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

इससे पहले, बीते दिनों गजोधरपुर गांव के संतोष यादव ने भी जंगल में अपने मवेशी चराते समय बाघ को देखा था। बाघ को देखते ही उनके जानवर भाग खड़े हुए। संतोष भी दौड़कर गांव आए और ग्रामीणों को बुलाया। जब लोग मौके पर पहुंचे, तो बाघ वहां से गायब हो चुका था, लेकिन उसके पैरों के निशान मौजूद थे, जिन्हें ग्रामीणों ने अपने मोबाइल फोन में कैद कर लिया है।

ग्रामीणों के अनुसार, यह कोई पहली घटना नहीं है। 24 अगस्त को चंद्रावल गांव में विनय मिश्रा की एक गाय को किसी जंगली जानवर ने अपना शिकार बना लिया था। इसी तरह, 22 अगस्त को इस्लामनगर के असरफनगर और मढ़िया गांवों में भी जंगली जानवर ने हमला कर बकरियों को निवाला बनाया था। इन लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद, ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के संबंधित अधिकारी गहरी नींद में सो रहे हैं और लोगों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

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