Varanasi News: चंद्रग्रहण के कारण दिन में निकली बाबा लाट भैरव की बारात, तीसरी बार बदली परंपरा
Sandesh Wahak Digital Desk: वाराणसी शहर के प्राचीन अष्ट भैरव मंदिरों में से एक, बाबा लाट भैरव मंदिर से जुड़ी परंपरागत भैरव बारात इस बार एक विशेष कारण से रविवार सुबह 7 बजे निकाली गई।
आमतौर पर रात्रि में निकलने वाली यह बारात चंद्रग्रहण के कारण दिन में आयोजित की गई — ऐसा इतिहास में केवल तीसरी बार हुआ है।
बारात निर्धारित मार्ग से होते हुए सुबह 11:30 बजे सूतक लगने से पहले मंदिर परिसर में संपन्न हुई।
इस विशेष आयोजन में पूर्व मंत्री व क्षेत्रीय विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी भी सम्मिलित हुए।
चंद्रग्रहण का असर: परंपरा में बदलाव
रविवार की रात 9:27 बजे लगने वाले चंद्रग्रहण और उसके दोपहर 12:57 बजे शुरू होने वाले सूतक काल को देखते हुए मंदिर समिति ने निर्णय लिया कि बारात को सुबह निकाला जाए, ताकि धार्मिक शुद्धता और परंपरा दोनों का पालन किया जा सके।
बारात का मार्ग इस प्रकार रहा:
इन्नामाई मंदिर → काल भैरव → दूध सट्टी → भगवती टॉकीज → कतुआपुरा → बलुआबीर → हनुमान फाटक → बाबा लाट भैरव मंदिर।
इतिहास में तीसरी बार दिन में निकली बारात
लाट भैरव मंदिर समिति के अध्यक्ष रोहित जायसवाल ने बताया कि परंपरागत रूप से बाबा की बारात रात्रि में निकाली जाती है, लेकिन इस बार ग्रहण के कारण दिन में आयोजन करना पड़ा।
उन्होंने बताया कि:
“यह इतिहास में तीसरी बार है जब बाबा लाट भैरव की बारात दिन में निकाली गई। इससे पहले कोविड काल में और एक अन्य चंद्रग्रहण के समय ऐसा हुआ था।”
नाचते-गाते श्रद्धालुओं ने भरा उत्साह
बारात में डीजे की धुन पर श्रद्धालु नाचते-गाते चल रहे थे, वातावरण में घंटे-घड़ियाल और भक्ति संगीत की गूंज थी। भक्तगण रंग-बिरंगे वस्त्रों में सजकर बाबा की बारात में शामिल हुए और पूरे मार्ग में “जय भैरव” के जयकारे लगाते रहे।
इस धार्मिक उत्सव में नगरवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से आए भक्त भी सम्मिलित हुए।
मंदिरों में पूजा-अर्चना के बाद होंगे बंद
चंद्रग्रहण के चलते रविवार को दोपहर 12:57 बजे से सूतक काल प्रारंभ हो गया, जिसके कारण शहर के अधिकतर मंदिर दोपहर 2 बजे के बाद बंद हो जाएंगे।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर रात 7:30 बजे बंद होगा और सोमवार को मंगला आरती के साथ पुनः खुलेगा।
रिपोर्ट- विशाल कुमार मौर्या

