राज्य कर विभाग में 28 करोड़ की खरीद में गड़बड़ी, अफसरों की मिलीभगत बेनकाब; प्रक्रिया निरस्त

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के राज्य कर विभाग में 28 करोड़ रुपये के कम्प्यूटर और प्रिंटर की खरीद में बड़ा खेल उजागर हुआ है। गोपनीय जांच में अफसरों की मिलीभगत साबित होने के बाद शासन ने पूरी प्रक्रिया निरस्त कर दी है।

फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर में विशेष शर्तें

दरअसल, विभाग में कम्प्यूटर और प्रिंटर की कमी को पूरा करने के लिए पिछले साल हर जोन को 20-20 लाख रुपये का बजट दिया गया था। लेकिन अनियमितताओं की शिकायतें इतनी बढ़ीं कि प्रमुख सचिव एम. देवराज ने व्यवस्था बदल दी और पारदर्शिता के लिए खरीद प्रक्रिया को सेंट्रलाइज्ड कर दिया। इसी के तहत निविदा जारी हुई, लेकिन जांच में पाया गया कि कुछ खास फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर में विशेष शर्तें जोड़ दी गईं।

कार्रवाई न होती तो सरकार को होता नुकसान

शिकायतों में सामने आया कि टेंडर के तकनीकी मानदंड इस तरह तय किए गए थे कि सिर्फ चुनिंदा कंपनियां ही पात्र हों। लखनऊ और एनसीआर की दो फर्मों के नाम इस पूरे खेल में सामने आए। विभाग और एनआईसी के कुछ अधिकारियों की संलिप्तता भी पाई गई। यदि समय रहते कार्रवाई न होती तो सरकार को कम से कम 4 करोड़ रुपये का नुकसान होता।

अब शासन ने आदेश दिया है कि आईटी उपकरणों की खरीद केवल निविदा प्रक्रिया से ही होगी। डेस्कटॉप की खरीद 10 से 15 प्रतिशत अतिरिक्त मात्रा में करने का निर्देश दिया गया है, जबकि प्रिंटर के लिए भी मानक तय कर दिए गए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में किसी भी टेंडर में 60-40 प्रतिशत बिडिंग व्यवस्था अपनाई जाएगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

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