लापता बच्चों को ढूंढना होगा आसान? सुप्रीम कोर्ट ने दिया राष्ट्रीय पोर्टल बनाने का सुझाव
Sandesh Wahak Digital Desk: बच्चों के अपहरण और तस्करी के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्देश दिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक राष्ट्रीय पोर्टल बनाने का आदेश दिया है, जिस पर सभी राज्य आपस में लापता बच्चों और तस्करी से जुड़े मामलों की जानकारी साझा करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन शामिल हैं, ने कहा कि अब तक उठाए गए कदम पर्याप्त नहीं हैं। कोर्ट के निर्देश के मुताबिक:
- राष्ट्रीय पोर्टल: केंद्रीय गृह मंत्रालय के नियंत्रण में एक ऐसा पोर्टल बनाया जाएगा, जहां सभी राज्य बच्चों के लापता होने और तस्करी से जुड़ी जानकारी अपलोड करेंगे।
- नोडल अधिकारी: हर राज्य में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जिनका विवरण सार्वजनिक होगा ताकि लोग सीधे उनसे संपर्क कर सकें।
- आपसी समन्वय: सभी राज्यों के नोडल अधिकारी इस पोर्टल के जरिए जुड़े रहेंगे और बेहतर समन्वय के साथ मामलों का समाधान करेंगे।
लापता बच्चों की जानकारी मांगी थी
यह कदम गुड़िया स्वयंसेवी संस्थान नामक NGO की याचिका पर आया है, जिसमें बाल तस्करी को एक संगठित अपराध बताते हुए बताया गया कि कमजोर परिवारों के बच्चे इसके शिकार होते हैं। कोर्ट ने सभी राज्यों से 2020 से अब तक के लापता बच्चों की जानकारी मांगी थी और पूछा कि इतने मामलों का समाधान क्यों नहीं हुआ।
केंद्र सरकार ने सुनवाई के दौरान अपने मौजूदा प्रयासों के बारे में बताया, जिसमें खोया/पाया पोर्टल, मानव तस्करी निरोधक इकाई (AHTU) और क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर (Cri-MAC) शामिल हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब समय है कि सभी राज्यों को एक राष्ट्रीय स्तर पर जुड़े सिस्टम के माध्यम से काम करना होगा।

