UP News: सीएम योगी की पहल से तेजी आई राजस्व मामलों के निस्तारण में, लखनऊ अव्वल तो जौनपुर ने मारी बाजी

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश में राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त मॉनिटरिंग का बड़ा असर देखने को मिल रहा है। सीएम योगी स्वयं हर माह जिलावार समीक्षा कर रहे हैं, जिसके चलते मामलों के निपटारे में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है। योगी सरकार की इस पहल के तहत प्रदेशभर में राजस्व विवादों को तेजी से निपटाने की रणनीति अपनाई गई, जिससे लंबित मामलों में बड़ी कमी आई है।

राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (RCCMS) की सितंबर माह की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक राजस्व मामलों का निस्तारण राजधानी लखनऊ में किया गया, जबकि जनपद स्तरीय न्यायालयों में जौनपुर ने बाजी मारी है।

लखनऊ टॉप पर, प्रयागराज दूसरे और शाहजहांपुर तीसरे स्थान पर

लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी. अय्यर के अनुसार, राजधानी में 21,296 मामलों का निस्तारण किया गया, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक है। इसके बाद प्रयागराज में 11,396, शाहजहांपुर में 9,075, जौनपुर में 8,856 और गोरखपुर में 8,448 मामलों का निपटारा किया गया।

जनपद स्तरीय न्यायालयों में जौनपुर अव्वल

जौनपुर के जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी की मंशा के अनुरूप जिले में राजस्व विवादों का प्राथमिकता से निस्तारण किया जा रहा है। RCCMS रिपोर्ट के मुताबिक, जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड द्वारा निर्धारित मानक से अधिक मामलों का निस्तारण किया है। मानक 250 मामलों के मुकाबले 704 मामलों का निस्तारण किया गया, जो 281.60% की उपलब्धि दर्शाता है।

राजस्व परिषद की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर माह में प्रदेशभर में कुल 3,88,145 राजस्व मामलों का निस्तारण किया गया। इसमें जनपदीय न्यायालयों में जौनपुर प्रथम, लखीमपुर खीरी द्वितीय और बस्ती तृतीय स्थान पर रहे।

भू-राजस्व मामलों में भी जौनपुर नंबर वन

इसी प्रकार भू-राजस्व मामलों के निस्तारण में भी जौनपुर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
अपर जिलाधिकारी (भू-राजस्व) जौनपुर ने निर्धारित मानक 50 के सापेक्ष 251 मामलों का निस्तारण कर प्रदेश में अव्वल स्थान हासिल किया। वहीं गाजीपुर और मीरजापुर क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।

सीएम योगी की सख्त मॉनिटरिंग का असर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राजस्व विवादों को जनहित में प्राथमिकता पर सुलझाया जाए। उनका उद्देश्य है कि जनता को त्वरित न्याय मिले और प्रशासन में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

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