93वां वायुसेना दिवस: एयर चीफ मार्शल बोले- तकनीक, कौशल और साहस में अग्रणी है IAF

Ghaziabad News: गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरबेस पर मंगलवार को भारतीय वायुसेना का 93वां स्थापना दिवस समारोह बड़े ही भव्य तरीके से मनाया गया। इस अवसर पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने देश को संबोधित किया और कहा कि भारतीय वायुसेना आज तकनीक, कौशल और क्षमता तीनों में विश्व स्तर पर अग्रणी है।

समारोह में सीडीएस, थलसेनाध्यक्ष और नौसेना प्रमुख सहित तीनों सेनाओं के प्रमुख मौजूद थे। हेरिटेज विमानों ने शानदार हवाई प्रदर्शन किया, जबकि तीनों सेनाओं के मार्चिंग दस्तों ने अपने बेहतरीन कदमताल से सबका ध्यान आकर्षित किया।

वायुसेना प्रमुख ने अपने संबोधन में भारतीय वायुसेना की गौरवशाली गाथा को याद किया। उन्होंने कहा, मुझे गर्व है कि मैं ऐसी वायुसेना का हिस्सा हूँ जो न केवल अत्याधुनिक तकनीक से लैस है, बल्कि साहस और समर्पण में भी अतुलनीय है। 1948, 1971, 1999 के युद्ध हों या फिर बालाकोट एयर स्ट्राइक और हालिया ऑपरेशन सिंदूर, हर बार भारतीय वायुसेना ने देश की रक्षा और सम्मान की नई मिसाल कायम की है।

उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की निर्णायक कार्रवाई का विशेष उल्लेख किया, जिसने भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत किया। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन निरंतर अभ्यास और प्रशिक्षण के जरिए बड़ी उपलब्धियां हासिल करने का प्रमाण है।

मानवीय सहायता में भी अग्रणी

एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि भारतीय वायुसेना केवल सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि मानवता की रक्षक भी है। बीते वर्ष वायुसेना ने राष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय राहत कार्यों में भी अद्वितीय भूमिका निभाई है।

राष्ट्रीय आपदाएँ: असम, मेघालय और सलेम (तमिलनाडु) में सुरंग बचाव अभियान हो या मणिपुर और सिक्किम में बाढ़/भूस्खलन की स्थिति, वायुसेना हर बार पहली प्रतिक्रिया देने वाली शक्ति रही है।

अंतरराष्ट्रीय सहायता: देश के बाहर भी, म्यांमार, लाओस, वियतनाम और केन्या जैसे संकटग्रस्त क्षेत्रों में राहत सामग्री और भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में वायुसेना ने सेवा परमो धर्मः की भावना को साकार किया है।

Air Force Raising Day

भविष्य के लिए संकल्प, सतर्कता और आत्म अनुशासन

वायुसेना प्रमुख ने वायु योद्धाओं को संबोधित करते हुए निरंतर प्रशिक्षण और आत्म अनुशासन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर स्तर पर नेतृत्व अग्रिम मोर्चे से किया जा रहा है, और यही वायुसेना की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा, हमें उभरती चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। यह आवश्यक है कि हम नियमित प्रशिक्षण से खुद को हर कार्य के लिए सक्षम बनाएं और यह संकल्प लें कि चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों, मैं कभी कमजोर नहीं पडूंगा।

संबोधन के अंत में, उन्होंने पूर्व वायुसेना कर्मियों (वेटरन्स) की विरासत को नमन किया और कहा, भारतीय वायुसेना सदैव राष्ट्र की सेवा में तत्पर रहेगी। हमारे साहस, प्रतिबद्धता और संकल्प से देश की सीमाएं सुरक्षित हैं और उसका मान अखंड।

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