जेपी जयंती पर लखनऊ में सियासी घमासान, अखिलेश को JPNIC जाने से रोका गया, पार्टी कार्यालय में दी श्रद्धांजलि

Sandesh Wahak Digital Desk: लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बार फिर सियासी ड्रामा देखने को मिला। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव को जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (JPNIC) परिसर में स्थित जेपी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने से रोक दिया गया, जिसके बाद उन्होंने पार्टी मुख्यालय में ही उन्हें श्रद्धांजलि दी।

सुरक्षा घेरे और बैरिकेडिंग

सरकार ने JPNIC के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। परिसर के प्रवेश द्वार को बंद कर दिया गया और टिन शेड की अस्थाई दीवार खड़ी कर दी गई थी। इसके अतिरिक्त, जेपीएनआईसी तक जाने वाले सभी मार्गों पर बैरिकेडिंग करके प्रवेश का रास्ता पूरी तरह से बंद कर दिया गया। सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पिछले वर्षों की तरह ही इस बार भी पार्टी कार्यालय के सभागार में जेपी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।

सपा का आरोप और पिछले साल का घटनाक्रम

सपा नेताओं ने सुरक्षा व्यवस्था को सरकार की दुर्भावना बताया। कुछ सपा कार्यकर्ताओं ने रात में ही परिसर में घुसकर प्रतिमा पर माल्यार्पण करने का दावा किया और कहा कि अगर अखिलेश यादव ठान लें तो उन्हें कोई रोक नहीं पाएगा। यह घटना पिछले दो वर्षों से चली आ रही खींचतान का हिस्सा है। 2023 में अखिलेश यादव को परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली थी, जिसके बाद वह गेट फांदकर अंदर गए थे और माल्यार्पण किया था।  यह केंद्र अखिलेश यादव की पूर्ववर्ती सपा सरकार के कार्यकाल में बनवाया गया था।

JPNIC पर विवाद और जांच 

योगी सरकार आने के बाद से यह कन्वेंशन सेंटर लगातार आठ वर्षों से बंद पड़ा है। JPNIC के निर्माण में कैग (CAG) की रिपोर्ट में कथित तौर पर बजट को अव्यवस्थित तरीके से बढ़ाने का उल्लेख किया गया था, जिसके बाद निर्माण कार्य की जाँच के आदेश दिए गए थे। अखिलेश यादव इस मुद्दे को उठाकर लगातार भाजपा सरकार को घेरते रहे हैं। उन्होंने यहाँ तक कहा था कि अगर सरकार JPNIC को बेचना चाहती है, तो समाजवादी पार्टी इसे खरीद लेगी। जेपी जयंती के मौके पर अखिलेश यादव को रोके जाने की घटना ने एक बार फिर इस मुद्दे को राजनीतिक गरमाहट दे दी है।

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