बलरामपुर: घायल दारोगा को एक घंटे तक नहीं मिला इलाज, अब सीएमओ ने डॉक्टर को भेजा नोटिस
सीएचसी श्रीदत्तगंज में लापरवाही उजागर, ड्यूटी पर न आने वाले डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग तेज
बलरामपुर। जिले के श्रीदत्तगंज थाना क्षेत्र के राजमार्ग पर बीते दिनों सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए एक उपनिरीक्षक को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र श्रीदत्तगंज लाया गया, जहां चिकित्सक के न पहुंचने के कारण उन्हें करीब एक घंटे तक इलाज नहीं मिल सका। इस दौरान दो थानों की पुलिस, कई सरकारी कर्मचारी और सीएमओ तक को फोन किए गए, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया। हमारी खबर प्रकाशित होने के बाद अब इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
सड़क हादसे में घायल हुए थे उपनिरीक्षक
घटना बीते शनिवार की है। जानकारी के अनुसार उतरौला कोतवाली में तैनात उपनिरीक्षक अनिल यादव पुलिस लाइन से उतरौला की ओर जा रहे थे। रास्ते में उनकी मोटरसाइकिल की टक्कर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली से हो गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर पहुंचे उतरौला प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज और श्रीदत्तगंज थानाध्यक्ष कर्मवीर सिंह ने उन्हें एंबुलेंस की मदद से सीएचसी श्रीदत्तगंज पहुंचाया।
लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद वहां इलाज के लिए कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। बताया गया कि रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक डॉ. सुमन सिंह चौहान की ड्यूटी थी, जो अपनी शिफ्ट पूरी कर घर जा चुके थे। रोस्टर के अनुसार उनके बाद डॉ. अभिषेक यादव को ड्यूटी ज्वाइन करनी थी, परंतु वो न तो समय पर अस्पताल पहुंचे और न ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके साथ ही एमओआईसी डॉ आनंद त्रिपाठी भी अस्पताल में नहीं रहते हैं। इस कारण इलाज में देरी हुई।
घायल दरोगा को समय पर नहीं मिला था उपचार
उतरौला प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज के मुताबिक, “घायल उपनिरीक्षक करीब एक घंटे तक अस्पताल में पड़े रहे और उन्हें कोई चिकित्सीय सहायता नहीं मिल सकी। सीएमओ बलरामपुर और चिकित्सा अधिकारी श्रीदत्तगंज को कई बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। अंततः जब एसडीएम उतरौला को सूचना दी गई, तब जाकर सीएमओ ने संपर्क किया।” उन्होंने कहा कि इस बीच घायल उपनिरीक्षक का लगातार खून बहता रहा और वे दर्द से तड़पते रहे। आखिरकार, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने स्वयं उनका रेफरल तैयार किया और उन्हें दूसरे अस्पताल भेजा गया।
सूत्रों के अनुसार, अब सीएमओ डॉ मुकेश रस्तोगी ने इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ सुमन सिंह चौहान को नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा है और उनका वेतन रोकने की कार्रवाई की है। जबकि डॉ. अभिषेक यादव, जिनकी वास्तविक ड्यूटी उस समय थी, के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
अपने निजी क्लीनिक पर प्रैक्टिस करते हैं डॉ. अभिषेक यादव
यह भी जानकारी मिली है कि डॉ. अभिषेक यादव, जो प्रादेशिक चिकित्सा सेवा (पीएमएस) के डॉक्टर हैं, बलरामपुर शहर में अपने निजी क्लीनिक पर भी प्रैक्टिस करते हैं। आचरण नियमावली के अनुसार सरकारी डॉक्टरों को न तो निजी प्रैक्टिस की अनुमति होती है और न ही बाहरी दवाइयां लिखने का अधिकार होता है।
इस मामले पर जब सीएमओ डॉ. मुकेश रस्तोगी से पक्ष लेने की कोशिश की गई, तो कार्यालय बंद होने के कारण संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर आगामी खबर में शामिल किया जाएगा।
फिलहाल, यह मामला सरकारी अस्पतालों में व्याप्त अव्यवस्था और जिम्मेदारों की लापरवाही को उजागर करता है। सवाल यह उठता है कि आम नागरिकों से लेकर पुलिसकर्मियों तक सभी को बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का खामियाजा क्यों भुगतना पड़ रहा है।
रिपोर्ट: योगेंद्र त्रिपाठी
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