कोबरापोस्ट का बड़ा आरोप, अनिल अंबानी समूह ने किया 28,874 करोड़ रुपये से अधिक का बैंकिंग फ्रॉड, मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका
Sandesh Wahak Digital Desk: खोजी पत्रकारिता करने वाली वेबसाइट कोबरापोस्ट ने गुरुवार को एक सनसनीखेज रिपोर्ट जारी कर आरोप लगाया है कि रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीए ग्रुप) ने एक बड़े बैंकिंग फ्रॉड को अंजाम दिया है। कोबरापोस्ट के अनुसार, 2006 से अब तक समूह ने बैंक लोन, आईपीओ (IPO) और बॉन्ड्स के माध्यम से जुटाई गई 28,874 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का हेरफेर किया है।
रिपोर्ट में खास तौर पर आरोप लगाया गया है कि एडीए समूह की कंपनियों ने विदेशों से जुटाए गए 1.53 बिलियन (लगभग 13,047 करोड़ रुपये) के फंड को फर्जी तरीके से भारत लाकर गायब कर दिया।
विदेशों से पैसा लाने और गायब करने का आरोप
कोबरापोस्ट की रिपोर्ट में बताया गया है कि विदेशों से जुटाए गए इस फंड में 750 मिलियन डॉलर की राशि भी शामिल थी, जिसे फर्जी तरीके से भारत लाया गया। आरोप है, 750 मिलियन डॉलर की पूरी राशि भारत भेजी गई और बाद में गायब कर दी गई। यही हाल उन सहायक कंपनियों का भी है जिनके जरिए एडीए समूह की होल्डिंग कंपनी रिलायंस इनोवेंचर्स को पैसा ट्रांसफर किया गया। यह गतिविधि संभावित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में आ सकती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB) से जुटाए गए 785 मिलियन डॉलर भी एडीए समूह की विभिन्न कंपनियों में पहुँचे, जिससे कुल डायवर्ट की गई राशि 1.53 बिलियन हो गई। कोबरापोस्ट का दावा है कि कुल मिलाकर यह राशि 41,921 करोड़ रुपये से अधिक है।
रिलायंस समूह ने आरोपों को नकारा
रिलायंस एडीए समूह ने तुरंत एक बयान जारी कर कोबरापोस्ट के इन सभी खुलासों का खंडन किया है। समूह ने रिपोर्ट को दुर्भावनापूर्ण और एजेंडा संचालित कैंपेन बताया। अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी ने आरोप लगाया कि मीडिया प्लेटफॉर्म का यह तथाकथित खुलासा समूह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने और पक्षकारों को गुमराह करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है।
कोबरापोस्ट 2019 से निष्क्रिय है और इसका पुनरुद्धार पूरी तरह से उन संस्थाओं द्वारा फंड किया गया है जिनकी रिलायंस समूह की संपत्ति हासिल करने में प्रत्यक्ष व्यावसायिक रुचि है। कोबरापोस्ट ने दावा किया है कि उसकी जाँच कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय, सेबी, एनसीएलटी और आरबीआई द्वारा प्रकाशित वैधानिक आदेशों, अदालती आदेशों और सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी जैसे कई आधिकारिक स्रोतों के गहन विश्लेषण पर आधारित है। रिपोर्ट में एडीए समूह पर कंपनी अधिनियम, फेमा, पीएमएलए और आयकर अधिनियम जैसे कई कानूनों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है।
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