फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों से नौकरी: आजमगढ़ में शिक्षिका पर मुक़दमा दर्ज, 22 अन्य शिक्षकों पर भी कार्रवाई की तैयारी
Sandesh Wahak Digital Desk: आजमगढ़ मंडल में वर्ष 2014-15 में माध्यमिक शिक्षा राजकीय विद्यालयों में मेरिट के आधार पर हुई सहायक शिक्षकों की नियुक्ति में बड़े फ़र्ज़ीवाड़े का खुलासा हुआ है। इस मामले में, राजकीय बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय देवगांव में अंग्रेजी की सहायक अध्यापिका प्रीति सिंह के ख़िलाफ़ देवगांव कोतवाली में मुक़दमा दर्ज किया गया है।
मामले की जड़
मिली जानकारी के अनुसार प्रीति सिंह सहित मंडल के कुल 22 शिक्षकों पर फ़र्ज़ी अंकपत्रों और प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त करने का आरोप है। जिसके बाद संयुक्त निदेशक आजमगढ़ मंडल की अध्यक्षता वाली कमेटी की जांच में 22 शिक्षकों के मार्कशीट और प्रमाण पत्र फ़र्ज़ी पाए गए हैं। इन शिक्षकों ने मोनार्ड यूनिवर्सिटी हापुड़ और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी की फ़र्ज़ी मार्क्सशीट लगाकर नौकरी हासिल की थी।
ज़िला विद्यालय निरीक्षक उपेंद्र कुमार ने आजमगढ़ की तीन महिला शिक्षकों (प्रीति सिंह, गीता और रूमन विश्वकर्मा) के ख़िलाफ़ संबंधित थानों में मुक़दमा दर्ज करने का निर्देश जारी किया है। तीनों शिक्षिकाओं से वेतन की वसूली (रिकवरी) भी की जाएगी। प्रीति सिंह पर मुक़दमा दर्ज होने के बाद अब दो अन्य शिक्षिकाओं पर भी कार्रवाई की जाएगी।
पृष्ठभूमि और व्यापकता
वर्ष 2014 में संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ कार्यालय से विभिन्न विषयों के 340 पदों पर सहायक अध्यापक की नियुक्तियाँ निकाली गईं थीं, जिनमें से 2015-16 में 252 शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी।
वर्ष 2020 में आठ शिक्षकों की फ़र्ज़ी मार्कशीट की शिकायत सही पाए जाने पर उन्हें पहले ही बर्खास्त किया जा चुका था। फ़र्ज़ीवाड़ा करने वाले 22 शिक्षकों में से 10 आजमगढ़, 8 मऊ और 4 बलिया ज़िले में नियुक्त हुए थे। इसी मामले में संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) कार्यालय के प्रशासनिक अधिकारी मनीष कुमार के ख़िलाफ़ भी 9 अक्टूबर को शहर कोतवाली आजमगढ़ में मुक़दमा दर्ज किया गया था।
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