GST चोरी का मेगा स्कैम: 122 फ़र्ज़ी फ़र्म बनाकर 341 करोड़ रुपये का चूना, मास्टरमाइंड गिरफ्तार, SIT जांच शुरू
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश में बोगस (फ़र्ज़ी) फ़र्मों का इस्तेमाल करके केंद्र और राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले एक बड़े जीएसटी चोरी सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, मुरादाबाद एसएसपी सतपाल अंतिल ने पुलिस की एक एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) गठित की है, जो इस पूरे मामले की गहनता से जांच करेगी।
राज्य कर विभाग ने लखनऊ-मुरादाबाद हाईवे पर लोहे से लदे दो ट्रकों को पकड़ा, जिसके बाद जांच में इस महा-घोटाले का खुलासा हुआ। दो अलग-अलग एफआईआर में लखनऊ के राजाजीपुरम का निवासी और लोहा कारोबारी अंकित कुमार समेत नौ लोगों को मास्टरमाइंड बनाया गया है। अंकित कुमार ने देश के अलग-अलग राज्यों में 122 बोगस फ़र्मों का रजिस्ट्रेशन कराकर क़रीब ₹341 करोड़ की जीएसटी चोरी की। इन फ़र्ज़ी फ़र्मों के माध्यम से ₹1811 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार किया गया।
एसआईटी जांच और व्यापकता
एसएसपी ने सीओ क्राइम के नेतृत्व में एसआईटी गठित की है, जिसमें साइबर सेल प्रभारी और सर्विलांस टीम प्रभारी को शामिल किया गया है। एसआईटी जिले में जीएसटी से संबंधित सभी आठ मुकदमों की जांच करेगी। इसमें ताज़ा ₹341 करोड़ की चोरी के दो मुकदमों के अलावा, लकड़ी कारोबारियों द्वारा बोगस फ़र्मों से ₹200 करोड़ की चोरी के दो माह पुराने छह मुक़दमे भी शामिल हैं, जिन पर पहले कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
एसआईटी बैंक, सर्विलांस और कॉल डिटेल रिपोर्ट (CDR) के माध्यम से सबूत जुटाएगी। आशंका जताई जा रही है कि मास्टरमाइंड अंकित कुमार के तार पंजाब और गुजरात के ‘सफेदपोशों’ से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस उनके ईमेल और सीडीआर को खंगाल रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।
अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप
जांच में यह भी पाया गया है कि सीजीएसटी (CGST) अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। अधिकारियों ने फ़र्मों का पंजीयन करने के बाद उनका भौतिक सत्यापन (Physical Verification) नहीं किया, जिसका फायदा उठाकर अंकित कुमार दो साल तक यह अवैध कारोबार करता रहा।
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