कुशीनगर में निर्माण कार्यों में शिथिलता पर DM सख्त, यूपी सीएनडीएस को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी

Sandesh Wahak Digital Desk: कुशीनगर जिलाधिकारी (DM) महेंद्र सिंह तंवर ने जनपद में ₹50 लाख से अधिक लागत वाले निर्माण कार्यों की प्रगति में अपेक्षित शिथिलता पाए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है। डीएम ने यूपी सीएनडीएस (UP CNDS) को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी करने और शासन को इस आशय का पत्र भेजने का निर्देश दिया है।

सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी वंदिता श्रीवास्तव की उपस्थिति में हुई समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने सभी कार्यदायी संस्थाओं को निर्धारित अवधि से पहले सभी लंबित कार्यों को पूरा करने की हिदायत दी।

खराब प्रगति पर डीएम के निर्देश

डीएम ने योजनावार समीक्षा करते हुए कार्यों को A, B और C श्रेणी में वर्गीकृत कर प्रगति की जाँच की। निर्माण कार्य में अपेक्षित प्रगति न होने के कारण यूपी सीएनडीएस को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया। जिन परियोजनाओं के पूर्ण होने की अंतिम तिथि मार्च या अप्रैल 2026 है, उन्हें प्रयास कर दिसंबर 2025 के अंत तक हर हाल में पूर्ण करने के लिए निर्देशित किया गया।

जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि किसी भी स्थिति में कार्य में लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। धीमी प्रगति वाले कार्यों के भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने और अपूर्ण कार्यों के लिए निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया गया।

प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा

बैठक में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा की गई, जिनमें शामिल हैं:

  • पुलिस लाइन में हॉस्टल निर्माण कार्य
  • रामपुर सोहरौना ताल का निर्माण कार्य
  • बौद्ध संग्रहालय का निर्माण कार्य
  • हिरण्यवती नदी का सौंदर्यीकरण
  • साइबर थाना और नवीन थाना (पर्यटन) निर्माण कार्य
  • पावा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और बुद्धा पार्क निर्माण कार्य

कृषि विश्वविद्यालय मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में जिलाधिकारी ने कृषि विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों की स्थिति का जायजा लिया। कार्यदायी संस्था को निर्देश दिया गया कि नियत तिथि अगस्त 2026 तक कार्य पूर्ण किया जाए, क्योंकि आगामी वित्तीय वर्ष में नामांकन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। डीएम ने इसे मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली परियोजना बताया। परियोजना की मासिक समीक्षा के लिए चार्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

बैठक में लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, जल निगम, तथा सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को ₹50 लाख से कम की परियोजनाओं की समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी।

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