विश्व सीओपीडी दिवस: ‘ई-सिगरेट और शीशा भी जानलेवा,’ KGMU विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
Sandesh Wahak Digital Desk: विश्व सीओपीडी दिवस (नवंबर के तीसरे बुधवार, इस वर्ष 19 नवंबर) के अवसर पर, लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के विशेषज्ञों ने क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) के बढ़ते खतरे पर चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सिगरेट और तंबाकू के साथ-साथ हुक्काबार में प्रचलित ई-सिगरेट और शीशा (हुक्का) का सेवन भी फेफड़ों के लिए घातक और जानलेवा साबित हो रहा है।
सीओपीडी और अस्थमा में अंतर समझना ज़रूरी
केजीएमयू के पल्मोनरी एवं रेसपरेटरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आर.एस. कुशवाहा ने बताया कि सीओपीडी और अस्थमा दोनों ही सांस से जुड़ी बीमारियाँ हैं, लेकिन दोनों में मौलिक अंतर है, जिसे समझना ज़रूरी है, अन्यथा गलत निदान से उपचार घातक हो सकता है।
| सीओपीडी (COPD) | अस्थमा (Asthma) |
| प्रकृति: प्रगतिशील बीमारी, फेफड़ों का नुकसान अक्सर स्थायी होता है। | प्रकृति: सांस की नली में अस्थायी सूजन के कारण होता है। |
| मुख्य कारण: लंबे समय तक धूम्रपान या प्रदूषण के संपर्क में रहना। | मुख्य कारण: एलर्जी या ट्रिगर्स के संपर्क में आने पर होता है। |
| उपचार: ब्रोंकोडायलेटर्स का उपयोग, बीमारी की प्रगति को धीमा करने पर केंद्रित। | उपचार: इनहेल्ड स्टेरॉयड (रिलीवर) का उपयोग, सही इलाज पर फेफड़ों की कार्यक्षमता सामान्य हो जाती है। |
मृत्युदर में तेजी से वृद्धि और खतरे के कारण
केजीएमयू पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन के प्रमुख प्रोफेसर वेद प्रकाश ने बताया कि पूरे विश्व में सीओपीडी से होने वाली मृत्युदर में काफी बढ़ोतरी हुई है।
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खतरे के आंकड़े: एक आकलन के अनुसार, वर्ष 2025 तक सीओपीडी से ग्रसित लोगों की संख्या 50 करोड़ से अधिक है। अगर सही समय पर इलाज न कराया गया तो यह आंकड़ा 2050 तक 65 करोड़ तक जा सकता है।
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बढ़ता चलन: उन्होंने बताया कि स्कूल और कॉलेज के छात्र-छात्राओं में हुक्काबार में ई-सिगरेट का चलन ‘स्टेटस सिंबल’ बनता जा रहा है, जो जानलेवा है।
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प्रदूषण का प्रभाव: भारत में न सिर्फ धूम्रपान बल्कि बढ़ता वायु प्रदूषण भी सीओपीडी का एक बड़ा कारण है।
वैश्विक चिंता और रोकथाम
डॉ. सचिन कुमार और डॉ. संदीप गुप्ता ने प्रकाश डालते हुए बताया कि सीओपीडी वायुमार्ग को संकुचित कर देता है और फेफड़ों के वायुकोशों को नष्ट कर देता है, जिससे फेफड़ों की कार्यक्षमता का नुकसान स्थायी होता है।
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चौथा प्रमुख कारण: सीओपीडी दुनिया भर में मौत का चौथा प्रमुख कारण है, जिसने 2021 में लगभग 3.5 मिलियन मौतें दर्ज कीं।
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रोकथाम: विशेषज्ञों ने धूम्रपान और प्रदूषण नियंत्रण कानूनों को सख्ती से लागू करने, और छोटी उम्र में बढ़ती लत पर प्रतिबंध लगाकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया है।

