यूपी रजिस्ट्री में 30 लाख का ‘SFT स्कैम’; अलीगढ़ के बाद अब आगरा-मेरठ पर भी आयकर का शिकंजा
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के रजिस्ट्री कार्यालयों में स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन (SFT) फाइलिंग को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। आयकर विभाग (Income Tax Department) द्वारा अलीगढ़ प्रथम उप निबंधक कार्यालय में की गई औचक छापेमारी में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिसके बाद आगरा और मेरठ सहित प्रदेश के कई बड़े जिलों में भी अचानक निरीक्षण किए गए हैं।
अलीगढ़ में ₹30 लाख की रजिस्ट्री में बड़ी अनियमितता
सूत्रों के अनुसार, यह अनियमितता ₹30 लाख रुपये से ऊपर की संपत्ति रजिस्ट्री की अनिवार्य SFT रिपोर्टिंग से जुड़ी है, जिसका उद्देश्य टैक्स चोरी को रोकना है।
जांच में पाया गया कि उप निबंधक कार्यालय अलीगढ़ प्रथम में 1000 से ज्यादा SFT तैयार की गई थीं, लेकिन इसमें से महज एक चौथाई का ही डेटा आयकर विभाग को भेजा गया। जो SFT भेजी भी गईं, उनमें भी भारी गड़बड़ियां मिलीं कई रिपोर्ट गलत, अधूरी या संदिग्ध पाई गईं। इससे संदेह गहरा हो गया है कि यह राजस्व की भारी हानि पहुँचाने वाला खेल सुनियोजित तरीके से कई वर्षों से चल रहा था।
आगरा, मेरठ में भी मिली अनियमितताएं
अलीगढ़ में हुए इस बड़े खुलासे के बाद आयकर विभाग ने तुरंत आगरा और मेरठ जैसे प्रमुख जिलों के रजिस्ट्री कार्यालयों में निरीक्षण किए। इन छापों में भी SFT फाइलिंग में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं मिली हैं, जिनमें डेटा मिसमैच, अधूरी प्रविष्टियां और संदिग्ध SFT पकड़ में आईं। इसके बाद प्रयागराज, कानपुर सहित कई जिलों के रजिस्ट्री कार्यालय भी जांच के घेरे में आ गए हैं, जिससे पूरे विभाग में अफरा-तफरी मची हुई है।
अधिकारियों पर जांच से बचने का आरोप
सूत्रों का दावा है कि आयकर विभाग की टीम जब अलीगढ़ कार्यालय पहुंची, तो वरिष्ठ अधिकारी लखनऊ में बैठक का हवाला देकर जांच से अलग हो गए और जिम्मेदारी अधीनस्थ पर डाल दी। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि जांच से बचने के लिए जानबूझकर ऐसा किया गया।
कर्मचारियों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, फंसने के बाद संबंधित अधिकारियों ने 15-20 दिनों में सभी SFT सही तरीके से भरने का आश्वासन दिया है।
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