फर्जी जमानत गिरोह का पर्दाफाश, मऊ पुलिस ने 9 लोगों पर किया केस दर्ज, कई जिलों में फैला था नेटवर्क

Sandesh Wahak Digital Desk: मऊ में फर्जी कागजातों के आधार पर अदालत से जमानत लेने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ है। कोतवाली पुलिस ने इस गिरोह से जुड़े नौ सदस्यों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार सिंह की तहरीर पर यह प्राथमिकी दर्ज की गई है।

पैसों के लालच में फर्जीवाड़ा

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह पैसों के लालच में संगठित रूप से काम करता था। ये लोग कूटरचित अभिलेखों, फर्जी दस्तावेजों, और गलत नाम-पते का उपयोग करके विभिन्न आपराधिक मामलों में अभियुक्तों की जमानत लेते थे।

गिरोह के नामजद सदस्य (9 अभियुक्त):

तारा देवी (निवासी हडहुआ, घोसी)

रामधारी (निवासी सरायगोकुल, गाजीपुर)

चंद्रशेखर (निवासी गाजीपुर)

सुमित्रा उर्फ विमल (निवासी राजापुर, गाजीपुर)

दुर्गविजय सिंह (निवासी कंधरापुर, आजमगढ़)

मिश्रीलाल (निवासी कंधरापुर, आजमगढ़)

रंजना उर्फ रेनू (निवासी दौलतपुर, घोसी)

उदयभान यादव (निवासी डिघवनिया, आजमगढ़)

शंकर (जमानतदार)

जांच में सामने आए तथ्य

फर्जी जमानत के एक अन्य मामले में आजमगढ़ पुलिस ने दुर्गविजय सिंह और मिश्रीलाल को 13 नवंबर को गिरफ्तार कर पहले ही जेल भेज दिया था।

अभियुक्ता रेनू उर्फ रंजना के जमानतदार उदयभान यादव के घर पर ताला मिला। पड़ोसियों ने बताया कि वह नशेड़ी किस्म का व्यक्ति है और पैसों के लिए अजनबी अभियुक्तों की जमानत लेता है।

तारा देवी उर्फ आँचल के जमानतदार रामधारी और चंद्रशेखर के बताए पते पर जाँच करने पर पता चला कि उस नाम-पते के व्यक्ति वहाँ निवास नहीं करते हैं। ग्राम प्रधान ने भी इसकी पुष्टि की।

प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार सिंह ने बताया कि यह गिरोह मऊ, आजमगढ़, बलिया और देवरिया जैसे कई जनपदों में फर्जी कागजात बनाकर जमानत कराने का काम करता था। इस संगठित अपराध के खिलाफ सख्त विधिक कार्यवाही की जा रही है।

Also Read: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज लखनऊ में करेंगी योग-ध्यान कार्यक्रम का उद्घाटन, डायवर्जन प्लान लागू

Get real time updates directly on you device, subscribe now.