बहराइच हिंसा मामले में बड़ा फैसला, दोषी सरफराज को फांसी की सजा, 9 दोषियों को उम्रकैद

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Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान भड़की सांप्रदायिक हिंसा में मारे गए 22 वर्षीय राम गोपाल मिश्रा की हत्या मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है।

अपर सत्र न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा की अदालत ने मुख्य आरोपी सरफराज को फांसी की सजा और नौ अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

13 अक्टूबर 2024 को महसी थाना क्षेत्र के महराजगंज में डीजे पर बज रहे गाने को लेकर विवाद हिंसक रूप ले चुका था। पथराव और फायरिंग के बीच सरफराज की गोली से राम गोपाल मिश्रा की मौत हो गई थी।

घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 11 जनवरी 2025 को चार्जशीट दाखिल की और 18 फरवरी को आरोप तय किए गए।

Bahraich Violence

कोर्ट ने 9 दिसंबर को 13 में से 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था, जबकि तीन को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

दोषियों में अब्दुल हमीद, फहीम, सरफराज, तालिब, सैफ, जावेद, जीशान, ननकऊ, शोएब और मारुफ शामिल हैं।

इनमें से सरफराज को फांसी की सजा मिली है। शासकीय अधिवक्ता प्रमोद सिंह ने बताया कि सिर्फ 13 महीने 26 दिन में ट्रायल पूरा हुआ, जो तेज न्याय की मिसाल है।

12 गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला

फरवरी से नवंबर तक चले ट्रायल में 12 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 21 नवंबर को फैसला सुरक्षित रखने के बाद आज अदालत ने अंतिम निर्णय सुनाया।

आरोपियों पर BNS की धारा 103(2) (मॉब लिंचिंग में हत्या) सहित कई गंभीर धाराएं लगाई गई थीं, जिनमें फांसी तक का प्रावधान है।

इन तीन आरोपियों को मिली थी राहत

कोर्ट ने 9 दिसंबर को सबूतों के अभाव में खुर्शीद, शकील और अफजल को बरी कर दिया था। हालांकि, मृतक की पत्नी रोली मिश्रा ने सभी दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की है।

घटना के मद्देनज़र प्रशासन ने इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया है, ताकि सांप्रदायिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनी रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही इस मामले में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया था।

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