बलरामपुर: चंदनपुर–अयोध्या मार्ग बना बदहाली से जनता परेशान, 35 किलोमीटर की जर्जर सड़क

Sandesh Wahak Digital Desk: बलरामपुर जिले के चंदनपुर से जैतापुर होते हुए भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या तक जाने वाला 137 किलोमीटर लंबा मार्ग आज क्षेत्र के लिए सुविधा नहीं, बल्कि संकट बन चुका है। बलरामपुर, गोंडा और अयोध्या—तीन जिलों को जोड़ने वाला यह मार्ग स्थानीय लोगों के लिए जीवन रेखा माना जाता है, लेकिन इसकी हालत ऐसी है कि मानो इसकी सांसें टूट चुकी हों।

35 किलोमीटर हिस्से की स्थिति बेहद दयनीय

जानकारी के अनुसार, इस पूरे मार्ग में से लगभग 102 किलोमीटर सड़क का निर्माण 6–7 वर्ष पूर्व कराया गया था, जो अब खुद टूटने की कगार पर है। वहीं, गैसड़ी ब्लॉक के गावरिया से पचपेड़वा के चंदनपुर तक के लगभग 35 किलोमीटर हिस्से की स्थिति बेहद दयनीय है। उसमें से भी गनवरिया से जुड़ीकुईयाँ तक तो सड़क ही नहीं बची है। गड्ढों से भरी सड़क, बरसात के दौरान पानी से लबालब रास्ता और आए दिन होने वाले हादसों ने इस मार्ग को “मौत का रास्ता” बना दिया है। आए दिन लोगों को चोटें लगती रहती हैं, लेकिन क्या सांसद, क्या विधायक और क्या बड़े बड़े अधिकारी किसी ने इस रास्ते के पुनर्निर्माण की बात तो छोड़िए गड्ढा मुक्त करवाने की ज़हमत तक उठाई है।

अयोध्या-चंदनपुर मार्ग के अंतर्गत आने वाले गनवरिया गांव से जुड़ीकुईयां चौराहे सड़क की बदहाली का असर परिवहन व्यवस्था पर भी साफ दिख रहा है। वाहन चालक इस मार्ग पर चलने से बच रहे हैं, बैटरी रिक्शा और अन्य छोटे वाहन रास्ते में ही खराब हो जाते हैं। नतीजतन यात्रियों को अधिक किराया देना पड़ रहा है, सफर लंबा और महंगा हो गया है। करीब पांच लाख की आबादी रोज़मर्रा की आवाजाही में भारी परेशानी झेल रही है।

गंभीर चोटों का सामना करना भी पड़ता है लोगों को

पचपेड़वा नगर पंचायत निवासी बताते हैं कि वर्षों से सड़क की हालत नहीं सुधर सकी है। सरकारें बदलीं, विधायक और सांसद बदले, लेकिन सड़क पर किसी की नजर नहीं पड़ी। खराब रास्ते के कारण वाहनों के शॉकर हर कुछ महीनों में बदलने पड़ते हैं और कई बार गड्ढों से ना बच पाने की वजह से आम जनमानस को गंभीर चोटों का सामना भी करना पड़ता है।

यहां से रोजाना यात्रा करने वाले लोगों का कहना है कि इसी सड़क से रोज़ स्कूल, अस्पताल और बाज़ार आना-जाना पड़ता हैं। वाहन खराब होने से जेब खर्च मरम्मत में चला जाता है और देर से पहुंचने पर काम वाली जगह पर नुकसान भी होता है। लेकिन कोई सुनने वाला है। एक युवा ने बताया कि वह अपने होश संभालने के साथ ही इसी तरह गड्ढों से युक्त रास्ते हमेशा सफ़र करता आ रहा है। उसने कहा कि इस रास्ते को बनाने की जहमत किसी ने नहीं उठाई। चाहे वह किसी भी पार्टी के नेता, मंत्री, विधायक या सांसद हो। हमारे क्षेत्र ने सभी को मौका दिया। लेकिन इस क्षेत्र के लिए किसी ने कोई काम नहीं किया। हम 5-7 लाख की आबादी इसी तरह की घटिया और दुर्घटनाओं का सबब बन चुकी सड़क से यात्रा करने को मजबूर हैं।

16 वर्ष बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं

स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि इस 35 किलोमीटर हिस्से का पुनर्निर्माण पिछले करीब 40 वर्षों से नहीं हुआ। समय बदला, पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन सड़क की हालत जस की तस बनी हुई है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2009 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इस मार्ग से गुजरे थे और इसे क्षेत्र का सबसे खराब रास्ता बताया था, लेकिन 16 वर्ष बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।

सोशल एक्टिविस्ट और किसान नेता आलम खान का कहना है कि यह किसी दल, जाति या धर्म का मुद्दा नहीं, बल्कि जनहित का सवाल है। राजनीतिक दल एक-दूसरे पर दोष मढ़ने में लगे हैं, जबकि जनता त्रस्त है। गर्भवती महिलाओं, मरीजों और आम लोगों को इस रास्ते से गुजरने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हम लोग बचपन से ही इस सड़क को ख़राब हालात में देख रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सड़क केवल मिट्टी और डामर का टुकड़ा नहीं, बल्कि हजारों लोगों की उम्मीद है, जिसे जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए।

जनहित याचिका हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच में दाखिल

वहीं, जब हमने इस मामले में सहायक अभियंता अशोक साहनी से बात की तो उन्होंने इस मार्ग के पुनर्निर्माण और चौड़ीकरण के लिए हम लोग हर साल वित्तीय स्वीकृति के भेजते हैं। लेकिन बैठक ना होने के कारण मामला फंस जाता है। इस सड़क का चूंकि पुनर्निर्माण होना है इसलिए इसकी रिपेयरिंग नहीं हो पा रही है। साथ ही, समाजसेवी महेंद्र त्रिपाठी ने इस सड़क के निर्माण को लेकर एक जनहित याचिका हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच में दाखिल कर रखी है। उसमें भी जवाब दिया गया है कि जैसे ही वित्त समिति की बैठक में इस सड़क के लिए स्वीकृति मिल जाएगी, तत्काल निर्माण कार्य शुरू करवाया जाएगा।

इस मामले पर गैंसड़ी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रहे शैलेश कुमार सिंह शैलू ने बताया कि यह सड़क 2017 तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत आच्छादित थी, जिसमें ठेकेदार के द्वारा इस सड़क के लिए पैच वर्क इत्यादि का कोई कार्य उनके गारंटी पीरियड में नहीं करवाया गया। साल 2017 में जब हमारी सरकार बनी तो हमने इसके लिए प्रयास शुरू किया और जब शिकायत की तो ठेकेदार का न केवल सिक्योरिटी मनी जिला प्रशासन द्वारा जप्त किया गया।

4 करोड़ में करवाया गया था पैच वर्क

बल्कि इस सड़क को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के आच्छादन से हटवाकर अन्य जिला मार्ग में लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड बलरामपुर के लिए स्वीकृत करवाया गया। साल 2019 में इस सड़क पर चार करोड रुपए की धनराशि से पैच वर्क करवाया गया था। तब से लेकर अब तक इस सड़क पर किसी भी तरह का कोई कार्य नहीं हुआ है।

पूर्व विधायक ने कहा कि अब हमारा प्रयास है कि इस सड़क को कम से कम 7 मीटर चौड़ा करते हुए पुनर्निर्माण करवाया जाए, जिसके लिए मुख्य अभियंता के द्वारा इसका डीपीआर इत्यादि बनवाकर शासन को प्रेषित किया जा चुका है। जल्द ही इस क्षेत्र के लोगों के लिए जुड़ीकुईयाँ से लेकर गनवरिया तक बदहाल सड़क के पुनर्निर्माण के लिए वित्तीय स्वीकृति होने की संभावना है। जैसे ही वित्तीय स्वीकृति मिलती है, सड़क का पुनर्निर्माण प्रारंभ हो जाएगा।

श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र से सपा सांसद राम शिरोमणि वर्मा ने हमसे बात करते हुए बताया कि इस सड़क के पुनर्निर्माण के लिए हमने कई बार केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की है और सदन में भी इस मुद्दे को उठाया है। यह सड़क राजनीतिक कारणों से नहीं बन पा रही है। शायद, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और लोक निर्माण विभाग के मंत्री का इसमें कोई इंटरेस्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि इस शासन काल में यदि यह सड़क नहीं बनेगी, तो जब हमारी सरकार आएगी तो हम इस सड़क को चौड़ीकृत व उच्चीकृत करवाते हुए बनवाने का काम करेंगे।

रिपोर्ट : योगेंद्र त्रिपाठी

 

Also Read: बलरामपुर: जेल से छूटते ही फिर हैवान बना अनीस, नाबालिग को डरा-धमकाकर किया गर्भवती

Get real time updates directly on you device, subscribe now.