सपा की ‘बाटी-चोखा’ पॉलिटिक्स: नए साल पर अखिलेश ने सहभोज के जरिए साधा भाजपा पर निशाना

Sandesh Wahak Digital Desk: साल 2026 के पहले दिन समाजवादी पार्टी के प्रादेशिक मुख्यालय लखनऊ में ‘बाटी-चोखा’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कहने को तो यह नए साल का जश्न था, लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयानों ने इसे एक धारदार राजनीतिक मंच में बदल दिया। उत्तर प्रदेश के कोने-कोने से आए दिग्गजों और कार्यकर्ताओं के बीच अखिलेश ने एकजुटता का संदेश देते हुए भाजपा पर जमकर तंज कसे।

“मिलजुल कर खाते हैं हम”

कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने हाल ही में भाजपा के ब्राह्मण विधायकों के सहभोज पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा “सपा की संस्कृति सबको साथ लेकर चलने की है। हमारे यहां कोई जाति या वर्ग भेद नहीं है, हम सब मिलजुल कर खाते हैं।” अखिलेश ने भाजपा के ब्राह्मण विधायकों के कार्यक्रम की ओर इशारा करते हुए कहा, “अभी वो विधायक बैठे-बैठे खा रहे हैं, अगर वे सरकार के खिलाफ खड़े हो गए तो क्या होगा?”

चुनावी अभियान की ‘सियासी दावत’

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बाटी-चोखा कार्यक्रम के जरिए सपा ने आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए शंखनाद कर दिया है। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सपा मुखिया ने कहा कि ऐसे आयोजनों से आपसी सम्मान और प्रेम बढ़ता है। इस सहभोज के जरिए पिछड़ों, दलितों और सवर्णों को एक साथ बिठाकर सपा ने भाजपा के ‘जातीय समीकरण’ की काट पेश करने की कोशिश की है।

नेताओं का भारी जमावड़ा

सपा मुख्यालय पर दिन भर वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का तांता लगा रहा। लखनऊ के सियासी गलियारों में यह चर्चा गर्म रही कि सपा ने नए साल के पहले ही दिन ‘बाटी-चोखा’ के बहाने भाजपा के खिलाफ मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की कोशिश की है।

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