सहारा से वापस ली गई गोमती नगर की जमीन का क्या होगा? हाई कोर्ट ने LDA और नगर निगम से मांगा जवाब
Sandesh Wahak Digital Desk: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने गोमती नगर स्थित उस बेशकीमती जमीन के भविष्य को लेकर कड़ा रुख अपनाया है, जिसे हाल ही में सहारा इंडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड से वापस लिया गया है। न्यायालय ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और नगर निगम को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई तक यह स्पष्ट करें कि इस भूमि का उपयोग किस प्रकार किया जाएगा।
ग्रीन बेल्ट बनाम कब्जा: क्या है विवाद?
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने ‘गोमतीनगर जन कल्याण महासमिति’ द्वारा वर्ष 2008 में दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर की। याची के अधिवक्ता बी.के. सिंह ने दलील दी कि मास्टर प्लान में इस पूरी जमीन को ग्रीन बेल्ट के रूप में चिन्हित किया गया है। उन्होंने चिंता जताई कि एलडीए और नगर निगम द्वारा कब्जा वापस लेने के बाद इसके उपयोग की योजना अभी तक स्पष्ट नहीं है।
सहारा इंडिया की ओर से तर्क दिया गया कि पूरी जमीन ग्रीन बेल्ट नहीं है। साथ ही, सहारा ने प्रशासन द्वारा जमीन को वापस अपने अधिकार में लेने की कार्रवाई को भी हाई कोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्तमान कार्यवाही से सहारा के कानूनी अधिकार प्रभावित नहीं होंगे, क्योंकि उनकी अपनी याचिका अभी विचाराधीन है।
अगली सुनवाई 19 जनवरी को
हाई कोर्ट ने अब जनहित याचिका और सहारा की याचिका को एक साथ संबद्ध (Link) कर दिया है। एलडीए और नगर निगम के वकीलों को निर्देश दिया गया है कि वे जमीन के प्रस्तावित उपयोग के संबंध में विभाग से विस्तृत निर्देश प्राप्त करें और 19 जनवरी 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में न्यायालय को अवगत कराएं।
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