प्रयागराज में एसटीएफ की बड़ी स्ट्राइक, 6-10 लाख में ‘डॉक्टर’ बनाने वाले गैंग का सरगना गिरफ्तार
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश एसटीएफ की फील्ड इकाई प्रयागराज ने एक अंतरराज्यीय गिरोह के मुख्य सरगना मोहम्मद तारूक को गिरफ्तार कर शिक्षा और चिकित्सा जगत में चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। यह गिरोह उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के मेडिकल संस्थानों की फर्जी बी०ए०एम०एस० (BAMS) मार्कशीट और डिग्री तैयार कर लोगों से लाखों रुपये वसूल रहा था।
कैसे हुआ इस ‘डॉक्टर’ फैक्ट्री का खुलासा?
इस पूरे खेल की पोल तब खुली जब मिर्जापुर के रहने वाले ब्रम्हानन्द नाम के एक व्यक्ति ने एसटीएफ के पास गुहार लगाई। ब्रम्हानन्द ने आरोप लगाया कि मोहम्मद तारूक ने उससे BAMS की डिग्री दिलाने के नाम पर करीब 6 लाख रुपये ऐंठ लिए और उसे फर्जी प्रमाणपत्र थमा दिए।
एसटीएफ के पुलिस उपाधीक्षक शैलेश प्रताप सिंह के निर्देशन और निरीक्षक जय प्रकाश राय के नेतृत्व में जब जांच शुरू हुई, तो मामला परत-दर-परत खुलता चला गया। उपनिरीक्षक गुलजार सिंह की टीम ने जब करेली स्थित अभियुक्त के ऑफिस ‘सावित्रीबाई फुले मेडिकल रिसर्च सेन्टर’ पर छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए।
6 लाख में ‘आयुर्वेदिक डॉक्टर’ और खुद भी बना ‘फर्जी हकीम’
गिरफ्तार अभियुक्त मो० तारूक ने पूछताछ में जो कबूल किया, वह चौंकाने वाला है। तारूक एक डिग्री के बदले 6 से 10 लाख रुपये तक वसूलता था। उसने अकेले ब्रम्हानन्द से शिवालिक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज और पूर्वांचल विश्वविद्यालय के नाम पर फर्जी डिग्री देने के लिए 6 लाख रुपये अपने बैंक खाते में लिए थे।
आरोपी तारूक ने न केवल दूसरों को फर्जी डिग्रियां बांटी, बल्कि उसने खुद की और अपनी पत्नी राशिदा परवीन की भी उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय से फर्जी BAMS डिग्री तैयार कर रखी थी। इसी फर्जी डिग्री के सहारे वह गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मासूम मरीजों का इलाज कर रहा था, जो उनकी जान के लिए बड़ा खतरा था।
कई यूनिवर्सिटीज के नाम का इस्तेमाल: वह उत्कल यूनिवर्सिटी (ओडिशा), वर्ल्ड काउन्सिलिंग फॉर रूरल एजुकेशन, और महर्षि चरक आयुर्वेदिक रिसर्च विद्यापीठ जैसे बड़े संस्थानों के नाम पर फर्जी कागजात तैयार करता था।
बरामदगी: कागजों का ढेर और डिजिटल सबूत
पुलिस ने आरोपी के पास से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है:
मार्कशीट का जखीरा: 68 अलग-अलग फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट्स की कॉपियां।
डिजिटल सबूत: 01 कंप्यूटर सीपीयू, 32 जीबी की पेन ड्राइव और एक मोबाइल फोन।
क्लीनिक: करेली स्थित हीनागोल्ड बेकरी के पास उसका ऑफिस सह क्लीनिक, जहां से यह काला कारोबार संचालित हो रहा था।
ठगी के शिकार हुए कई नाम आए सामने
पूछताछ के दौरान एसटीएफ को उन लोगों की लंबी सूची मिली है जिन्हें तारूक ने ठगा था। इनमें रिया केसरवानी, अनिल धनीराम, नारूल शुभम, संकल्प गुप्ता और मो० दानिश जैसे कई युवा शामिल हैं, जिनसे लाखों रुपये लेकर उन्हें फर्जी डॉक्टर बनाने का झांसा दिया गया था। आरोपी ने इलेक्ट्रो होम्योपैथी के नाम पर भी फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट बांटे थे।
कानूनी शिकंजा और पुलिस की अपील
गिरफ्तार अभियुक्त मो० तारूक के खिलाफ प्रयागराज के थाना करेली में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 338, 336(3), 340 और 66 आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। स्थानीय पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी शॉर्टकट के चक्कर में न पड़ें। डॉक्टर या किसी भी पेशेवर डिग्री के लिए अधिकृत संस्थानों और विश्वविद्यालयों की आधिकारिक वेबसाइट से ही जानकारी लें। डिग्री के बदले पैसे मांगने वाले ऐसे गिरोहों की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
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