चुनाव से एक दिन पहले पैसे देने के ऐलान पर सियासी घमासान, ECI ने महाराष्ट्र सरकार से मंगा जवाब
Sandesh Wahak Digital Desk: महाराष्ट्र में सरकार ने संक्रांति के महापर्व पर लाडली बहन योजना की दिसंबर और जनवरी माह की किस्त एक साथ लाभार्थी महिलाओं के खातों में जमा करने की तैयारी की है। इस बार महिलाओं को कुल 3000 रुपए की राशि दी जानी है, जिसे लेकर राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सरकार के इस कदम पर कांग्रेस पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखकर इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताया है।
किस्त देने पर कांग्रेस की आपत्ति
कांग्रेस ने चुनाव आयोग को भेजे अपने पत्र में कहा है कि 15 तारीख को मतदान होना है और उससे ठीक पहले महिलाओं के खातों में इस तरह से राशि ट्रांसफर करना चुनावी नियमों के खिलाफ है। कांग्रेस का कहना है कि इस योजना के तहत करीब एक करोड़ महिलाओं को लाभ मिलने वाला है और ऐसे समय पर पैसा भेजने से सत्ताधारी पार्टी को चुनावी फायदा पहुंच सकता है। पार्टी ने इसे सरकारी घूस की संज्ञा देते हुए मांग की है कि लाडली बहन योजना की किस्त मतदान के बाद ही लाभार्थियों के खातों में जमा की जाए।
कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह योजना के खिलाफ नहीं है, बल्कि उसके समय को लेकर आपत्ति जता रही है। पार्टी का तर्क है कि चुनावी माहौल में इस तरह की बड़ी वित्तीय मदद मतदाताओं के निर्णय को प्रभावित कर सकती है।
ECI ने मांगा राज्य सरकार से जवाब
कांग्रेस की शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र के मुख्य सचिव से सरकार का पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। आयोग ने मुख्य सचिव राजेश कुमार को पत्र भेजकर यह जानना चाहा है कि किस आधार पर चुनाव से ठीक पहले यह राशि जारी की जा रही है।
कांग्रेस के महाराष्ट्र महासचिव संदेश कोंडविलकर ने भी आयोग से मांग की है कि 14 जनवरी को लाडली बहन योजना की जो दो किस्तें डाली जा रही हैं, उन्हें तत्काल रोका जाए। इस पर आयोग ने राज्य सरकार से जवाब तलब कर लिया है।
कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप
इस पूरे विवाद पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। भाजपा ने कांग्रेस के पत्र पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि कांग्रेस महिला विरोधी है और वह महिलाओं को मिलने वाली मदद में बाधा डालना चाहती है। भाजपा का कहना है कि लाडली बहन योजना राज्य की महिलाओं के लिए एक अहम योजना है और इसे रोकने की मांग करना कांग्रेस की नीयत को उजागर करता है।
संक्रांति से पहले लाडली बहनों को मिलने वाली इस राशि ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया सियासी मोड़ ला दिया है। अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग के फैसले और राज्य सरकार के जवाब पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि चुनाव से पहले यह किस्त जारी होगी या नहीं।

