KGMU में आर-पार की जंग: अपर्णा यादव समर्थकों पर FIR न होने से भड़के डॉक्टर, हड़ताल की चेतावनी

Sandesh Wahak Digital Desk: लखनऊ के केजीएमयू में पिछले कई दिनों से जारी तनाव अब हड़ताल की शक्ल ले चुका है। यूनिवर्सिटी के पांचों प्रमुख संगठनों और शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि जब तक 9 जनवरी को कुलपति कार्यालय पर बवाल करने वाले बाहरी तत्वों पर एफआईआर दर्ज नहीं होती, वे काम पर नहीं लौटेंगे।

क्यों नाराज हैं केजीएमयू के डॉक्टर और कर्मचारी?

यूनिवर्सिटी प्रशासन का आरोप है कि राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के समर्थकों ने परिसर में घुसकर अमर्यादित व्यवहार किया और कामकाज में बाधा डाली। चीफ प्रॉक्टर डॉ. आरएएस कुशवाहा ने चौक कोतवाली में लिखित तहरीर दी थी, लेकिन पुलिस ने अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की है।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर कुलपति कार्यालय जैसी सुरक्षित जगह पर बवाल करने वालों पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह बेहद निराशाजनक है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर उन्हें पूरे मामले की जानकारी दे सकती हैं।

अपर्णा यादव के गंभीर आरोप

दूसरी तरफ, अपर्णा यादव ने केजीएमयू प्रशासन पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यौन उत्पीड़न की शिकार रेजिडेंट डॉक्टर को महिला आयोग जाने से रोका और विशाखा कमेटी के नाम पर बरगलाया। अपर्णा का आरोप है कि विभाग के शिक्षकों ने समय पर सुनवाई नहीं की, जिससे तंग आकर छात्रा ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केजीएमयू ने आरोपी डॉ. रमीज को भागने का मौका दिया। अपर्णा ने बताया कि रविवार को वह वीसी से मिलने गईं थीं, लेकिन करीब 10 मिनट तक कहने के बाद भी वीसी ऑफिस का दरवाजा नहीं खोला गया।

मरीजों पर बढ़ेगी मुसीबत

अगर मंगलवार को केजीएमयू के डॉक्टर और कर्मचारी हड़ताल पर अड़े रहते हैं, तो राजधानी समेत पूरे प्रदेश से आने वाले हजारों मरीजों का इलाज प्रभावित हो सकता है। ओपीडी से लेकर सामान्य सर्जरी तक पर इसका सीधा असर पड़ेगा। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर ही अगली कार्रवाई की जाएगी।

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