बहराइच: रिश्वतखोर पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज, आरोपी को छोड़ने के लिए मांगे 1 लाख, SHO समेत 3 सस्पेंड

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने एक बड़ी और नजीर पेश करने वाली कार्रवाई की है। अपहरण के एक मामले में आरोपी को छोड़ने के बदले एक लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में मटेहरा थाने के थाना प्रभारी (SHO) सुरेंद्र कुमार बौध, एक सब-इंस्पेक्टर और एक कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

मामला कोलकाता से जुड़ी एक युवती के अपहरण से शुरू हुआ था। दरअसल, गजेंद्र सिंह नाम के युवक पर पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में अपहरण का केस दर्ज था। वह युवती को लेकर बहराइच के मटेहरा थाना क्षेत्र स्थित अपने बहनोई मुनीजर सिंह के घर छिपा हुआ था। 11 जनवरी को पश्चिम बंगाल पुलिस ने स्थानीय मटेहरा पुलिस की मदद से युवती को बरामद कर लिया और गजेंद्र व उसके बहनोई मुनीजर को थाने ले आई।

छोड़ने के बदले मांगी ‘मोटी रकम’

आरोप है कि युवती की बरामदगी के बाद आरोपी मुनीजर सिंह को रिहा करने के बदले मटेहरा पुलिस ने एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। मुनीजर के रिश्तेदारों ने पुलिस के दबाव में आकर पैसे तो दे दिए, लेकिन साथ ही इसकी शिकायत आईजी देवीपाटन रेंज की एंटी-करप्शन हेल्पलाइन पर कर दी।

शिकायत मिलते ही आईजी अमित पाठक ने मामले की गोपनीय जांच के आदेश दिए। जांच में सामने आया कि रिश्वत के आरोप पूरी तरह सही थे। SHO सुरेंद्र कुमार बौध, दरोगा विशाल जायसवाल और सिपाही अवधेश यादव इस वसूली के खेल में सीधे तौर पर शामिल थे। जैसे ही भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई, अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) दुर्गा प्रसाद तिवारी ने तीनों को शुक्रवार को निलंबित कर दिया।

रिश्वत के पैसे कराए गए वापस

पुलिस विभाग ने अपनी साख बचाते हुए न केवल दोषी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया, बल्कि शिकायतकर्ता से ली गई एक लाख रुपये की रकम भी वापस करा दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विभाग में भ्रष्टाचार की कोई जगह नहीं है और इन तीनों के खिलाफ अब विभागीय जांच (Departmental Inquiry) के आधार पर आगे की कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Also Read: कुशीनगर: समाधान दिवस में उमड़ी फरियादियों की भीड़, DM-SP ने बाल विवाह मुक्त भारत की दिलाई शपथ

Get real time updates directly on you device, subscribe now.