Varanasi News: मरीना ने पहनी बनारसी साड़ी, तो मरिंग ने शेरवानी, गंगाघाट पर हिन्दू रीति-रिवाज के साथ एक हुए विदेशी कपल

Varanasi News: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में दशाश्वमेघ घाट पर एक विदेशी कपल ने हिंदू रीति रिवाज से विवाह रचाकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कॉन्स्टेंटिन मरिंग और मरीना ने गंगा तट पर वैदिक परंपराओं के अनुसार सात फेरे लेकर सात जन्मों के बंधन में बंधने का संकल्प लिया। रूस से मॉस्को के रहने वाले इस कपल ने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के प्रति अपने गहरे लगाव को इस विवाह के माध्यम से दर्शाया।

रूस से काशी तक प्रेम का सफर

दरअसल कॉन्स्टेंटिन मरिंग रूस के एक व्यापारी हैं। जो करीब पांच साल पहले वह वाराणसी घूमने आए थे, जहां काशी की संस्कृति, परंपरा और विशेष रूप से शिव पार्वती के पवित्र और अभिन्न प्रेम ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। वहीं रूस लौटने के बाद उनकी मुलाकात मरीना से हुई, जिनका पहले से ही भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति झुकाव था। दोनों ने मिलकर यह फैसला किया कि वे अपने दांपत्य जीवन की शुरुआत काशी में हिंदू रीति रिवाज से करेंगे।

जिसके बाद दशाश्वमेघ घाट पर गंगा किनारे स्थित एक मंदिर में इस दंपत्ति ने पारंपरिक हिंदू रीति रिवाज से विवाह किया। भारतीय वेश भूषा में सजे इस कपल ने अग्नि को साक्षी मानकर वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच एक दूसरे के साथ फेरे लिए। पार्वती और भगवान शिव के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए दोनों ने विवाह की सभी रस्में पूरी कीं।

सिंदूर और आस्था का भावनात्मक पल

यहां इस विवाह के दौरान रूसी युवक कॉन्स्टेंटिन मरिंग ने अपनी पत्नी की मांग में सिंदूर भरा, जो इस समारोह का सबसे भावुक और महत्वपूर्ण क्षण रहा। इस दंपत्ति ने हिंदू धर्म और भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था को दर्शाते हुए इस परंपरा को पूरे सम्मान के साथ निभाया। कॉन्स्टेंटिन मरिंग ने कहा कि रूस में जिस तरह वोल्गा नदी का विशेष महत्व है, उसी तरह भारत में गंगा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। गंगा किनारे काशी की परंपरा के अनुसार शादी कर दांपत्य जीवन की शुरुआत करना उनके लिए एक अलौकिक और दिव्य अनुभव है।

शिव पार्वती के प्रेम से जुड़ी यादगार शादी

दशाश्वमेघ घाट पर आयोजित यह विवाह न केवल इस विदेशी दंपत्ति के लिए बल्कि वहां मौजूद लोगों के लिए भी एक यादगार क्षण बन गया। इस अनोखी शादी को देखने के लिए घाट पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। काशी में विदेशी जोड़ों के आकर शादी करने की घटनाएं पहले भी सामने आई हैं, लेकिन शिव पार्वती के प्रेम से प्रेरित होकर किसी विदेशी जोड़े का यहां आकर विवाह करना एक अद्भुत और प्रेरणादायक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

 

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