UGC रेगुलेशन 2026 के खिलाफ अमेठी में आक्रोश, पत्रकारों ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
अमेठी: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षा में लागू किए गए नए नियमों (रेगुलेशन 2026) का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को प्रेस क्लब अमेठी के सदस्यों ने इस कानून को भेदभावपूर्ण बताते हुए राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी संजय चौहान को सौंपा। पत्रकारों की मांग है कि इस कानून को देश और छात्रों के हित में तत्काल वापस लिया जाए।
‘असमानता और असुरक्षा का माहौल पैदा करेगा नया नियम’
प्रेस क्लब अमेठी के अध्यक्ष शीतला प्रसाद मिश्र ने नए नियमों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सरकार समानता और समावेशन का तर्क दे रही है, लेकिन हकीकत में यह कानून शिक्षण संस्थानों में असंतोष पैदा करेगा। उन्होंने कहा, “यह रेगुलेशन पूरी तरह एकपक्षीय है, जो कुछ विशेष वर्गों को लाभ देने के नाम पर सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ घोर अन्याय करेगा। इससे कैंपस के भीतर भेदभाव और असुरक्षा की भावना पैदा होगी।”
पत्रकारों ने उठाए गंभीर सवाल
विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि क्या अब तक देश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में भेदभाव मुक्त वातावरण नहीं था, जो इस तरह के विवादास्पद कानून की जरूरत पड़ी? यह कानून आने वाली पीढ़ियों के बीच दरार पैदा करने वाला है। समाज के सजग प्रहरी होने के नाते, पत्रकारों का यह दायित्व है कि वे इस ‘काले कानून’ का पुरजोर विरोध करें।
बड़ी संख्या में जुटे पत्रकार
ज्ञापन सौंपने के दौरान डॉ. आशीष त्रिपाठी, अनुज पांडेय, अभिषेक त्रिपाठी, डॉ. धर्मेंद्र कुमार तिवारी समेत जिले के तमाम वरिष्ठ पत्रकार मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में कहा कि यदि सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो विरोध को और तेज किया जाएगा।
रिपोर्ट: राम धीरज यादव
Also Read: बिछड़े बच्चों के लिए ‘फरिश्ता’ बनी लखनऊ RPF, इंस्पेक्टर चन्दना सिन्हा को मिला रेल सेवा पुरस्कार

