बृजभूषण शरण सिंह के तेवर सख्त: यूजीसी के नए नियमों को बताया ‘समाज बांटने वाला’, आंदोलन की चेतावनी
Sandesh Wahak Digital Desk: कैसरगंज से भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज और कड़े तेवरों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने अपनी ही सरकार के ‘यूजीसी के नए नियमों’ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गोंडा के विश्नोहरपुर स्थित अपने आवास पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने साफ कहा कि यह कानून समाज में दूरियां पैदा करने वाला है और अगर इसे वापस नहीं लिया गया, तो देशव्यापी आंदोलन होगा।
‘दफ्तरों में बैठकर तय नहीं होता कि समाज कैसे चलेगा’
बृजभूषण शरण सिंह ने सामाजिक समरसता का हवाला देते हुए सरकार को जमीन से जुड़ने की सलाह दी। अपने घर के आंगन में खेल रहे बच्चों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “इनमें मेरे परिवार के बच्चों के साथ-साथ दलित और ओबीसी समाज के बच्चे भी शामिल हैं। ये साथ खेलते हैं और साथ बैठकर नाश्ता करते हैं। दफ्तरों में बैठकर कानून बनाने वालों को गांव आकर देखना चाहिए कि यहाँ कोई भेदभाव नहीं है।”
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार भविष्य में ऐसा माहौल चाहती है जहाँ किसी खास वर्ग का प्रवेश किसी के घर में वर्जित हो जाए? उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून ठीक वैसी ही कड़वाहट पैदा कर रहा है।
सवर्ण, दलित और पिछड़ों से एकजुट होने की अपील
पूर्व सांसद ने इस लड़ाई को किसी एक जाति की लड़ाई मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा सवर्ण समाज को चाहिए कि वह दलित और पिछड़े समाज के बुद्धिजीवियों के साथ बैठे और मिलकर इस कानून का विरोध करे। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई अपराध करता है, तो सजा उसे मिलनी चाहिए, न कि पूरी जाति को आरोपी बना देना चाहिए। उन्होंने पुराने कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि सख्ती के नाम पर बने कानूनों का अक्सर दुरुपयोग ज्यादा होता है, जिससे सामाजिक ताना-बना बिगड़ता है।
‘सनातन वाटिका’ और सामाजिक समरसता
बृजभूषण ने हाल ही में हुए ‘राष्ट्र कथा’ कार्यक्रम का जिक्र किया, जिसमें 52 अलग-अलग जातियों के धर्मगुरुओं ने हिस्सा लिया था। उन्होंने बताया कि सभी के सहयोग से एक ‘सनातन वाटिका’ बनाई जा रही है जो एकता का प्रतीक है। उनके अनुसार, सरकार का यह नया कानून इस एकता के मिशन को गहरी चोट पहुंचा रहा है।
हाथ जोड़कर सरकार से विनती करने के साथ-साथ बृजभूषण ने चेतावनी भी दी कि यदि इस बिल को वापस नहीं लिया गया, तो वे एक ऐसा आंदोलन खड़ा करेंगे जिसमें समाज का हर वर्ग शामिल होगा।

