GST कमिश्नर प्रशांत सिंह पर सगे भाई का बड़ा हमला, बोले- ‘मैनेज नहीं कर पाए तो इस्तीफे का खेल खेला’
Sandesh Wahak Digital Desk: अयोध्या जिले के जीएसटी अधिकारी प्रशांत सिंह का इस्तीफा महज एक ‘भावनात्मक फैसला’ नहीं, बल्कि जांच से बचने की एक ‘सोची-समझी रणनीति’ है। यह गंभीर आरोप किसी और ने नहीं, बल्कि उनके अपने सगे बड़े भाई विश्वजीत सिंह ने लगाए हैं। विश्वजीत का दावा है कि प्रशांत और उनकी बहन (जो तहसीलदार हैं) दोनों ने फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र के सहारे पीसीएस की कुर्सी हासिल की है।
अयोध्या के जीएसटी अधिकारी प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफे का मामला अब एक पारिवारिक और कानूनी जंग में बदल गया है। खुद उनके बड़े भाई ने सामने आकर जो खुलासे किए हैं, उसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
’31 साल की उम्र में बनवाया 40% विकलांगता का सर्टिफिकेट’
विश्वजीत सिंह ने दस्तावेजों के हवाले से बताया कि प्रशांत सिंह की जन्मतिथि 28 अक्टूबर 1978 है। उन्होंने आरोप लगाया कि 27 अक्टूबर 2009 को, जब प्रशांत 31 साल के थे, उन्होंने सीएमओ मऊ के जरिए 40 फीसदी विकलांगता का सर्टिफिकेट बनवाया। इसी कोटे (PH रिजर्वेशन) का लाभ लेकर उन्होंने 2011 बैच में चयन पाया।
बीमारी ऐसी, जो दुनिया में उस उम्र में होती ही नहीं!
बड़े भाई का दावा है कि सर्टिफिकेट में जिस बीमारी का जिक्र किया गया है, वह उस आयु वर्ग में चिकित्सा जगत के अनुसार संभव ही नहीं है। विश्वजीत ने बताया, “जब मैंने सीएमओ मऊ को सबूत दिखाए, तो उन्होंने भी माना कि प्रमाण पत्र गलत बना है। सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था (स्टेट ऑफ यूपी बनाम रविंद्र कुमार शर्मा) के तहत री-मेडिकल के लिए बोर्ड गठित हुआ, लेकिन प्रशांत कभी हाजिर ही नहीं हुए।”
विश्वजीत का कहना है कि मामला अब राज्य आयुक्त दिव्यांगजन तक पहुंच चुका है। उनके मुताबिक, “प्रशांत शुरू से ही इस जांच को मैनेज कर रहे थे, लेकिन जब इस बार उनकी दाल नहीं गली, तो उन्होंने इस्तीफे का नाटक रचा। वह चाहते हैं कि इस्तीफा मंजूर हो जाए ताकि न जांच आगे बढ़े और न ही अब तक ली गई सैलरी की रिकवरी हो सके।”
तहसीलदार बहन पर भी फर्जीवाड़े का आरोप
आरोपों की आंच प्रशांत की छोटी बहन जया सिंह तक भी पहुंच गई है, जो वर्तमान में कुशीनगर के हाटा में तहसीलदार के पद पर तैनात हैं। विश्वजीत का आरोप है कि दोनों भाई-बहनों ने एक ही डॉक्टर से अलग-अलग सालों (2009 और 2012) में फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए। फिलहाल, दोनों के खिलाफ जांच जारी है और विश्वजीत ने सभी संबंधित दस्तावेज होने का दावा किया है।
रिपोर्ट: राघवेंद्र मल्ल
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