राज्य का प्रशासनिक ढांचा भ्रष्ट, अयोग्य, अदक्ष और अनप्रोफेशनल है: तेजस्वी यादव
Sandesh Wahak Digital Desk: बिहार की राजधानी पटना में रहकर नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंपने की सिफारिश कर दी है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने एनडीए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
CBI जांच को लेकर तेजस्वी यादव का बयान
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि यह मामला एनडीए सरकार के करप्ट और कंप्रोमाइज तंत्र की तथाकथित सफलता का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि नीट छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या जैसे गंभीर मामले का खुलासा करने के बजाय बिहार सरकार ने केस को CBI को सौंपकर एक बार फिर साबित कर दिया है कि राज्य का प्रशासनिक ढांचा भ्रष्ट, अयोग्य, अदक्ष और अनप्रोफेशनल है। तेजस्वी यादव ने कहा कि ऐसा प्रशासन एक बलात्कार और हत्या के मामले को भी सुलझाने में सक्षम नहीं है।
तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने कहा कि पुलिस से अधिक यह एनडीए सरकार की बड़बोली और करप्ट व्यवस्था की पहचान है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री दिन रात अपराधियों को पकड़ने के दावे करते रहते हैं लेकिन हकीकत कुछ और ही है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि नवरुणा कांड जैसे कई मामलों में सीबीआई 12 से 13 वर्षों तक आरोपियों को नहीं पकड़ सकी और अंततः जांच बंद कर दी गई।

जंगलराज के आरोपों पर पलटवार
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि चुनाव के समय जंगलराज का शोर मचाने वाले लोग अब कहां हैं। उन्होंने पूछा कि बिहार की ध्वस्त और भ्रष्ट विधि व्यवस्था की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा। तेजस्वी यादव ने आशंका जताई कि इस मामले में भी सरकार हेडलाइन मैनेजमेंट के जरिए जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करेगी।
तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने यह भी कहा कि यह मामला पहले से एसआईटी के पास था और जांच के दौरान कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया था। इसी बीच शुक्रवार को मृतका के परिजनों ने राज्य के डीजीपी से मुलाकात की थी और अपनी बात रखी थी।
घोषणा के बाद राजनीतिक घमासान
वहीं शनिवार सुबह डिप्टी सीएम सह गृह विभाग के मंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि अब इस मामले की जांच सीबीआई से कराई जाएगी और इसके लिए राज्य सरकार ने अनुशंसा भेज दी है। इस घोषणा के बाद से ही बिहार की राजनीति में घमासान मचा हुआ है और सरकार तथा विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
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