1.25 लाख के इनामी ‘कातिल भाई’ गिरफ्तार, पहचान बदलकर छिपे थे हसीब और नसीब, UP STF ने दबोचा

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश एसटीएफ की नोएडा फील्ड यूनिट ने एक ऐसे सनसनीखेज मामले का पर्दाफाश किया है, जिसकी फाइलें पिछले 10 साल से धूल फांक रही थीं। एसटीएफ ने सोमवार सुबह अयोध्या के बीकापुर इलाके से दो सगे भाइयों, हसीब और नसीब को गिरफ्तार किया। इन दोनों पर अयोध्या से एक-एक लाख रुपये और पीलीभीत से 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। यानी, यूपी पुलिस की ‘मोस्ट वांटेड’ लिस्ट में शामिल इन अपराधियों पर कुल सवा लाख रुपये का इनाम था।

इंदौर में ‘समीर’ और ‘रेहान’ बनकर काट रहे थे फरारी

हसीब और नसीब इतने शातिर थे कि उन्होंने पुलिस से बचने के लिए न केवल अपना शहर छोड़ा, बल्कि अपनी पहचान भी पूरी तरह बदल ली थी। पीलीभीत के रहने वाले ये दोनों भाई मध्य प्रदेश के इंदौर में ‘समीर खान’ और ‘रेहान खान’ के नाम से रह रहे थे। एसटीएफ ने इनके पास से कूटरचित (फर्जी) आधार कार्ड और पैन कार्ड भी बरामद किए हैं, जो इंदौर के पते पर बनवाए गए थे।

लालच से शुरू हुआ और कत्ल पर खत्म हुआ सफर

पूछताछ के दौरान अभियुक्त नसीब ने जुर्म की जो दास्तान सुनाई, उसने पुलिस वालों को भी हैरान कर दिया। इनकी आपराधिक कुंडली दो बड़े हिस्सों में बंटी हुई है।

  1. चिटफंड के नाम पर करोड़ों की ठगी

साल 2014-15 में इन भाइयों ने अपने साथियों के साथ मिलकर ‘खुशहाल रियल ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक कंपनी बनाई। पीलीभीत के भोली-भाली जनता को पैसा दोगुना करने का झांसा देकर इन्होंने करोड़ों रुपये निवेश कराए और रातों-रात ऑफिस बंद कर फरार हो गए। इस मामले में पीलीभीत के सेरामऊ उत्तरी थाने में धोखाधड़ी के कई मुकदमे दर्ज हुए।

  1. टवेरा ड्राइवर की बेरहमी से हत्या और लूट

ठगी के बाद पुलिस जब इनके पीछे पड़ी, तो ये वाराणसी भाग गए। वहां साल 2016 में इन्होंने एक नई और खौफनाक योजना बनाई। हसीब और नसीब ने वाराणसी से लखनऊ के लिए एक ‘टवेरा’ गाड़ी बुक की। रास्ते में चाय पीने के बहाने गाड़ी रुकवाई और ड्राइवर को नशीली वस्तु सुंघाकर बेहोश कर दिया। इसके बाद जो हुआ वह रूह कंपा देने वाला था। नसीब ने ड्राइवर के पैर पकड़े और हसीब ने अपने अंगोछे से उसका गला घोंटकर हत्या कर दी। लाश को अयोध्या के बीकापुर में सड़क किनारे फेंककर ये गाड़ी लूटकर फरार हो गए।

STF ने ऐसे बुना गिरफ्तारी का जाल

एसटीएफ नोएडा के इंस्पेक्टर सचिन कुमार और उनकी टीम को सूचना मिली थी कि अयोध्या के बीकापुर हत्याकांड में वांछित दोनों इनामी भाई इंदौर में छिपे हुए हैं। एसटीएफ की टीम ने गुप्त रूप से इंदौर में दबिश दी और दोनों को पूछताछ के लिए अयोध्या लाई। कड़ाई से पूछताछ करने पर दोनों ने अपना असली नाम कबूल किया और हत्या की बात स्वीकार ली।

गिरफ्तार भाइयों पर दर्ज प्रमुख मुकदमे

अयोध्या (बीकापुर): हत्या, लूट और साक्ष्य मिटाने की संगीन धाराओं (302, 394, 201) के तहत मामला दर्ज।

पीलीभीत (सेरामऊ): धोखाधड़ी और जालसाजी (420, 467, 468) के तहत केस दर्ज।

भगोड़ा घोषित: कोर्ट में हाजिर न होने पर इनके खिलाफ धारा 174ए की कार्रवाई भी की गई थी।

कानून के लंबे हाथ

हसीब और नसीब की गिरफ्तारी से पुलिस ने यह संदेश दिया है कि अपराधी चाहे अपनी पहचान बदल ले या राज्य, कानून के लंबे हाथ उन तक पहुंच ही जाते हैं। फिलहाल दोनों को अयोध्या पुलिस के हवाले कर दिया गया है, जहां से उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। एसटीएफ अब यह भी जांच कर रही है कि फरारी के दौरान किन-किन लोगों ने इनकी मदद की थी।

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