युमनाम खेमचंद सिंह के हाथों में अब मणिपुर की कमान, चुने गए विधायक दल के नेता

Sandesh Wahak Digital Desk: मणिपुर में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है। दिल्ली में हुई भाजपा विधायक दल की अहम बैठक में युमनाम खेमचंद सिंह को सर्वसम्मति से नेता चुन लिया गया है। पेश से इंजीनियर रहे 62 वर्षीय खेमचंद सिंह पिछली बीरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और अब वे अशांत मणिपुर में शांति बहाली की मुख्य जिम्मेदारी संभालेंगे।

कौन हैं नए सीएम खेमचंद सिंह?

मेतई समुदाय से आने वाले युमनाम खेमचंद सिंह इंफाल की सिंगजामेई विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बेहद करीबी माने जाते हैं और अपनी सादगी व प्रशासनिक सूझबूझ के लिए जाने जाते हैं।

अनुभव: पिछली सरकार में नगर प्रशासन और आवास विभाग के मंत्री रहे।

सियासी कद: 2022 में भी उनका नाम मुख्यमंत्री की रेस में प्रमुखता से आया था।

शिक्षा: राजनीति में आने से पहले वे एक सफल इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे।

दिल्ली में हुआ फैसला, गोविंद दास और विश्वजीत सिंह को पीछे छोड़ा

मुख्यमंत्री की इस दौड़ में गोविंद दास और टी. विश्वजीत सिंह जैसे दिग्गज नेता सबसे आगे बताए जा रहे थे, लेकिन अंत में बाजी खेमचंद के हाथ लगी। खास बात यह है कि यह बैठक इंफाल के बजाय दिल्ली में हुई, क्योंकि कुकी समुदाय के भाजपा विधायक केंद्रीय नेतृत्व के साथ सुरक्षित माहौल में चर्चा करना चाहते थे। केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुग की मौजूदगी में खेमचंद के नाम पर मुहर लगी।

जातीय हिंसा और राष्ट्रपति शासन का दौर

मणिपुर पिछले करीब डेढ़ साल से मुश्किल दौर से गुजर रहा है। मई 2023 में मेतई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुई हिंसा में अब तक 260 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। हालात बेकाबू होने पर पिछले साल 13 फरवरी को तत्कालीन सीएम एन. बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू था।

संख्या बल और भविष्य की योजना

60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में भाजपा की स्थिति काफी मजबूत है।

भाजपा: 37 विधायक

एनपीपी (सहयोगी): 6 विधायक

NPF (सहयोगी): 5 विधायक

माना जा रहा है कि 4 फरवरी को शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद मणिपुर के सभी विधायक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करने राष्ट्रपति भवन भी जा सकते हैं। नए मुख्यमंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य में शांति बहाल करना और विस्थापित हुए हजारों लोगों को दोबारा बसाना होगी।

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