गैंगस्टर रवि काना की गुपचुप रिहाई, बांदा जेल अधीक्षक और जेलर पर FIR

Banda News: बांदा मंडल जेल से गैंगस्टर रवि काना की संदिग्ध रिहाई ने उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने जेल अधीक्षक, जेलर और अन्य अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 260 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। लापरवाही की गाज जेलर विक्रम सिंह यादव पर गिरी है, जिन्हें सस्पेंड कर दिया गया है।

रवि काना नोएडा और आसपास के इलाकों में रंगदारी और स्क्रैप माफिया के रूप में जाना जाता है। वह कई गंभीर मामलों में वांछित था और बांदा जेल में बंद था। मामला तब उलझा जब 29 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उसकी कोर्ट में पेशी हुई। नोएडा पुलिस ने उसकी रिमांड मांगी थी, लेकिन उसी शाम उसे जेल से रिहा कर दिया गया। सवाल यह उठ रहा है कि जब आरोपी पर अन्य संगीन मामले लंबित थे और बी-वारंट जारी था, तो जेल प्रशासन ने उसे रिहा करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई?

SIT की छापेमारी और गहन पूछताछ

मामले की गंभीरता को देखते हुए बांदा के पुलिस अधीक्षक (SP) पलाश बंसल ने एक विशेष जांच टीम (SIT) बनाई है। मंगलवार को एएसपी के नेतृत्व में इस टीम ने जेल के भीतर करीब 5 से 6 घंटे तक डेरा डाला। जांच के दौरान जेल के कैमरों की फुटेज और रिहाई से जुड़ी फाइलों को कब्जे में लिया गया। 10 जेल कर्मियों और 9 कैदियों से अलग-अलग पूछताछ की गई। जेल अधीक्षक अनिल गौतम से एक बंद कमरे में घंटों पूछताछ की गई।

इस मामले ने जब तूल पकड़ा, तो गौतम बुद्ध नगर की कोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाया और जेल प्रशासन से जवाब तलब किया। इसके बाद डीजी (कारागार) पीसी मीणा ने मामले की जांच डीआईजी प्रयागराज को सौंप दी। फिलहाल, प्रयागराज से आए आलोक कुमार को बांदा का नया जेलर नियुक्त किया गया है।

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