UP News: 2 साल में 1 लाख से ज्यादा लोग लापता, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश में लापता हो रहे लोगों की बढ़ती संख्या पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न केवल स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है, बल्कि इसे एक जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश भी दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का लापता होना राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

हैरान करने वाले आंकड़े: गायब लाखों, मिले चंद हजार

जस्टिस राजन राय और जस्टिस एके चौधरी की खंडपीठ के सामने एक गुमशुदगी के मामले की सुनवाई के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले करीब दो वर्षों में उत्तर प्रदेश से 1,08,300 लोग लापता हुए हैं। इन सभी मामलों में पुलिस में एफआईआर दर्ज है। हैरानी की बात यह है कि पुलिस अब तक इनमें से केवल 9,700 लोगों को ही खोज पाई है। अदालत ने इन आंकड़ों को ‘बेहद चिंताजनक’ करार देते हुए पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

ACS होम और DGP की होगी पेशी

कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि गुमशुदा व्यक्तियों से जुड़ा अब तक का पूरा रिकॉर्ड और ताजा आंकड़े अदालत में पेश किए जाएं। सख्त लहजे में कोर्ट ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई के दौरान अपर मुख्य सचिव (गृह) और पुलिस महानिदेशक (DGP) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहें।

अगली सुनवाई 23 मार्च को

हाईकोर्ट ने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले में राज्य सरकार से एक ठोस कार्ययोजना (Action Plan) चाहती है। कोर्ट का उद्देश्य लापता लोगों की तलाश के लिए पुलिस की ट्रैकिंग प्रणाली को और अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाना है। मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 23 मार्च को होगी।

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