सीधे गिरफ्तार नहीं कर सकती है पुलिस, जरूरी है नोटिस: Supreme Court

Sandesh Wahak Digital Desk: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि जिन अपराधों में अधिकतम 7 साल तक की सजा का प्रावधान है, उनमें पुलिस किसी व्यक्ति को सीधे गिरफ्तार नहीं कर सकती है। अगर ऐसे मामलों में गिरफ्तारी करनी है तो गिरफ्तारी से पहले पुलिस को नोटिस देना होगा। बिना नोटिस दिए गिरफ्तारी नहीं की जा सकती है।

सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम CBI मामले में आया फैसला

दरअसल यह फैसला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम CBI मामले में सुनाया है। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने यह निर्णय दिया। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी पुलिस का अधिकार जरूर है, लेकिन यह कोई मजबूरी या रूटीन प्रक्रिया नहीं हो सकती है।

यहां सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS 2023 की धारा 35(3) के तहत 7 साल तक की सजा वाले मामलों में पहले नोटिस देना जरूरी है। इस नोटिस के जरिए आरोपी को जांच में पेश होने और जांच में सहयोग करने के लिए कहा जाता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी की परिस्थितियां होने के बावजूद आरोपी को तब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है जब तक यह बिल्कुल जरूरी न हो।

सिर्फ पूछताछ के लिए नहीं हो सकती गिरफ्तारी

यहां सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपने फैसले में यह भी कहा कि पुलिस सिर्फ किसी को पूछताछ के लिए गिरफ्तार नहीं कर सकती है। गिरफ्तारी तभी की जानी चाहिए जब पुलिस अधिकारी को इसके लिए ठोस वजह नजर आए। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं हो सकती है।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगर आरोपी ने अपराध किया है और बिना हिरासत में लिए जांच आगे बढ़ाना संभव नहीं है, तो इसके लिए भी पुलिस के पास ठोस कारण होना चाहिए। पुलिस अपनी मनमर्जी से गिरफ्तारी नहीं कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी की शक्ति को पुलिस की सुविधा नहीं बल्कि एक सख्त कानूनी जरूरत के रूप में देखा जाना चाहिए। पहले नोटिस दिया जाए और गिरफ्तारी को आखिरी विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाए।

जांच में सहयोग न करने पर ही गिरफ्तारी

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि आरोपी को तभी गिरफ्तार किया जाए जब वह जांच में सहयोग न करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि नोटिस के बाद गिरफ्तारी कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है बल्कि एक अपवाद है, जिसका इस्तेमाल बहुत सोच समझकर किया जाना चाहिए। कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों से उम्मीद जताई कि वे गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल संयम और जिम्मेदारी के साथ करेंगे।

जसिके बाद अब ऐसा माना जा रहा है कि, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के इस फैसले का सीधा फायदा आम नागरिकों को मिलेगा। अब 7 साल तक की सजा वाले मामलों में बिना वजह गिरफ्तारी नहीं की जा सकेगी। पहले आरोपी को नोटिस दिया जाएगा और अगर पुलिस गिरफ्तारी करना चाहती है तो इसके लिए मजबूत कारण बताने होंगे।

 

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