‘बजट तो ऐतिहासिक है, पर कर्मचारियों के हाथ खाली’, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने जताई निराशा
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश सरकार के ऐतिहासिक बजट पर जहां एक ओर विकास की चर्चा हो रही है, वहीं कर्मचारी संगठनों ने अपनी अनदेखी पर सवाल उठाए हैं। सिद्धार्थनगर से आई इस खबर में कर्मचारियों के दर्द और उनकी मांगों को प्रमुखता से रखा गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए 9 लाख 12 हजार 669 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को लेकर प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। बस्ती मंडल के राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष अरुण कुमार प्रजापति ने इस बजट को ‘मिला-जुला’ करार देते हुए कहा कि सरकार ने किसानों और युवाओं का तो ख्याल रखा, लेकिन राज्य की रीढ़ कहे जाने वाले कर्मचारियों को पूरी तरह भुला दिया।
शिक्षा और कृषि पर जोर, पर कर्मचारी क्यों हैं निराश?
‘संदेश वाहक‘ से खास बातचीत के दौरान अरुण प्रजापति ने कहा कि पिछले वर्ष के मुकाबले बजट में 12% की बढ़ोतरी स्वागत योग्य है। सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे बुनियादी क्षेत्रों पर निवेश बढ़ाकर एक संतुलित ढांचा तैयार करने की कोशिश की है, जो राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
हालांकि, उन्होंने कर्मचारियों की अनदेखी पर कड़े शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बजट में पुरानी पेंशन (OPS) की बहाली को लेकर कोई प्रावधान न होने से लाखों कर्मचारियों में मायूसी है। संविदा और आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन इस पर बजट मौन रहा। संविदा कर्मियों के लिए एसीपी जैसी सुविधाओं का जिक्र न होना भी संगठन को खटक रहा है।
सरकार से पुनर्विचार की अपील
अरुण प्रजापति ने सरकार से मांग की है कि इतने बड़े बजट में कर्मचारियों के कल्याण के लिए भी फंड आवंटित होना चाहिए। उन्होंने अपील की कि सरकार पुरानी पेंशन जैसे गंभीर मुद्दों पर फिर से विचार करे, ताकि सरकारी मशीनरी को चलाने वाले कर्मचारी खुद को ठगा हुआ महसूस न करें।
रिपोर्ट: जाकिर खान
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