सिद्धार्थनगर: दबंगों के हमले में घायल महिला की मौत, SHO के सस्पेंशन की मांग को लेकर सपा का प्रदर्शन

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद में कानून-व्यवस्था और पुलिस की घोर लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। थाना ढेबरुआ क्षेत्र के अंतर्गत एक दलित/पिछड़े परिवार की महिला की दबंगों द्वारा पिटाई के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना ने तब तूल पकड़ लिया जब मृतिका के पति और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर आरोप लगाया कि घटना के तीन दिन बाद तक और महिला की मौत तक पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया।

सिद्धार्थनगर: दबंगों के हमले में घायल महिला की मौत, SHO के सस्पेंशन की मांग को लेकर सपा का प्रदर्शन

सार्वजनिक रास्ते का विवाद और जानलेवा हमला

घटना 8 फरवरी 2026 की है। ढेबरुआ थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत तालकुंडा (टोला केवटलिया) की निवासी 46 वर्षीय कृष्णावती पत्नी लालजी चौहान दोपहर करीब 2 बजे अपने खेत में खाद डालकर सार्वजनिक रास्ते से घर लौट रही थीं। आरोप है कि गांव के ही दबंग परिवार के सदस्यों ने उन्हें सार्वजनिक रास्ते पर चलने से रोका। जब कृष्णावती ने विरोध किया, तो विपक्षी सुरेंद्र चौहान, शीला देवी, सरिता, सविता, संजना समेत आधा दर्जन लोगों ने गोलबंद होकर उन पर लोहे की रॉड और लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया।

पुलिस की लापरवाही: तहरीर पर भी नहीं दर्ज हुई FIR

खून से लथपथ कृष्णावती को परिजन तत्काल ढेबरुआ थाने लेकर पहुंचे। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस ने इस गंभीर मामले को ‘हल्के’ में लिया और दबंगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बजाय घायल महिला के परिजनों को ही फटकार लगाकर वापस भेज दिया। पुलिस की इसी संवेदनहीनता के कारण अपराधी खुलेआम घूमते रहे और घायल महिला तड़पती रही। परिजनों ने उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बढ़नी में भर्ती कराया, जहाँ से गंभीर स्थिति देखते हुए उन्हें माधव प्रसाद त्रिपाठी चिकित्सा महाविद्यालय (सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेज) रेफर कर दिया गया। यहाँ तीन दिनों तक मौत से लड़ने के बाद बुधवार को कृष्णावती ने दम तोड़ दिया।

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“जब तक थानाध्यक्ष सस्पेंड नहीं, तब तक न पीएम होगा न अंतिम संस्कार”

महिला की मौत की खबर मिलते ही उसका पति लालजी चौहान, जो पड़ोसी देश नेपाल में मजदूरी करने गया था, वापस घर लौटा। घर में मातम देख और पुलिस की कार्यशैली से आहत होकर लालजी चौहान ‘संदेश वाहक‘ से बात करते हुए ने कठोर निर्णय लिया। उन्होंने ऐलान किया कि जब तक दोषी थानाध्यक्ष ढेबरुआ को सस्पेंड नहीं किया जाता और हत्यारोपियों को जेल नहीं भेजा जाता, तब तक वह अपनी पत्नी का न तो पोस्टमार्टम (PM) कराएंगे और न ही दाह संस्कार करेंगे।

गुरुवार सुबह से ही पीड़ित परिवार मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर धरने पर बैठ गया। यह खबर जिले में जंगल की आग की तरह फैल गई, जिससे स्थानीय प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।

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सपा जिलाध्यक्ष का खुला समर्थन

मामले की गंभीरता को देखते हुए समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष लालजी यादव अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। उन्होंने पीड़ित पति लालजी चौहान के साथ जमीन पर बैठकर धरने को समर्थन दिया। लालजी यादव ने पुलिस प्रशासन पर सत्ता के दबाव में काम करने और गरीबों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। सपा जिलाध्यक्ष ने दो टूक कहा कि पुलिस ने तीन दिनों तक मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया? क्या पुलिस महिला की मौत का इंतजार कर रही थी? उन्होंने मांग की कि थानाध्यक्ष को तत्काल निलंबित किया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच हो।

प्रशासनिक दबाव और वर्तमान स्थिति

देर शाम तक पोस्टमार्टम हाउस पर धरना जारी रहा। माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। सपा जिलाध्यक्ष ने घोषणा की है कि वे थानाध्यक्ष के निलंबन और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जिलाधिकारी (DM) को ज्ञापन सौंपेंगे। समाचार लिखे जाने तक परिजन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका है।

यह घटना उत्तर प्रदेश में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति और पुलिस की ‘संवेदनशीलता’ पर बड़े सवाल खड़े करती है। एक तरफ जहां सरकार अपराधियों पर नकेल कसने का दावा करती है, वहीं ढेबरुआ पुलिस की यह लापरवाही एक गरीब परिवार पर भारी पड़ गई।

रिपोर्ट: जाकिर खान

 

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