कानपुर लैंबॉर्गिनी कांड: तंबाकू कारोबारी का बेटा शिवम मिश्रा गिरफ्तार, SOG ने ‘हिट एंड रन’ के आरोपी को दबोचा

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के कानपुर में वीआईपी रोड पर हुए भीषण ‘हिट एंड रन’ मामले में मुख्य आरोपी शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया गया है। शिवम, प्रसिद्ध तंबाकू कारोबारी के.के. मिश्रा का बेटा है। घटना के बाद से ही फरार चल रहे शिवम को कानपुर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, शिवम पर अपनी लग्जरी लैंबॉर्गिनी कार से कई लोगों को रौंदने और मौके से फरार होने का गंभीर आरोप है।

8 फरवरी की वह खौफनाक दोपहर

यह पूरा मामला 8 फरवरी 2026 की दोपहर का है। कानपुर की वीआईपी रोड पर तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी कार (DL 11 CF 4018) ने कहर बरपाया था। कार ने एक बुलेट मोटरसाइकिल और एक ऑटो को जोरदार टक्कर मारी थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, वहीं बुलेट और ऑटो सवार चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में शामिल मोहम्मद तौफीक ने ग्वालटोली थाने में तहरीर दी, जिसके आधार पर पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।

ड्राइवर को ‘बलि का बकरा’ बनाने की कोशिश

हादसे के बाद से ही शिवम मिश्रा पुलिस की गिरफ्त से दूर था, लेकिन पर्दे के पीछे से मामले को रफा-दफा करने और पुलिस को गुमराह करने की कई कोशिशें की गईं। इस मामले में कोर्ट के सामने दो विरोधाभासी अर्जियां दाखिल की गईं:

शिवम मिश्रा की ओर से पहली अर्जी में दावा किया गया कि उसकी कार से कोई हादसा नहीं हुआ है, बल्कि भीड़ ने उनकी कार का शीशा तोड़ा है। इस आधार पर उसने कार को रिलीज करने की मांग की। दूसरी अर्जी उनके स्थायी ड्राइवर मोहन एम की ओर से दाखिल की गई। मोहन ने दावा किया कि हादसे के वक्त वह कार चला रहा था और वह सरेंडर करना चाहता है।

हालांकि, ग्वालटोली पुलिस की सतर्कता ने इस साजिश को नाकाम कर दिया। पुलिस ने एसीजेएम (ACJM) कोर्ट को दी अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि जांच के दौरान ड्राइवर मोहन का नाम कहीं भी सामने नहीं आया है। पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय ने ड्राइवर की सरेंडर अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि दोषी को बचाने के लिए किसी निर्दोष को ‘बलि का बकरा’ नहीं बनाया जा सकता।

SOG की घेराबंदी और गिरफ्तारी

शिवम मिश्रा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज कराने का बहाना बनाया और पुलिस के नोटिस के बावजूद पेश नहीं हुआ। पुलिस की जांच में इलेक्ट्रॉनिक सर्विलेंस और चश्मदीदों के बयानों से यह साफ हो गया कि स्टीयरिंग पर शिवम खुद मौजूद था। इसके बाद कानपुर पुलिस की एसओजी टीम को सक्रिय किया गया। एसओजी ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर शिवम का पीछा किया और उसे गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की।

विधिक कार्रवाई और कोर्ट का रुख

न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी को आदेश दिया है कि कार का परीक्षण कराकर 13 फरवरी तक विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए। वहीं, शिवम के वकीलों का कहना है कि वे ड्राइवर के सरेंडर को खारिज करने के फैसले के खिलाफ जिला जज की अदालत में रिवीजन याचिका दाखिल करेंगे। फिलहाल, पुलिस शिवम से पूछताछ कर रही है ताकि घटना के समय मौजूद अन्य तथ्यों और साक्ष्यों को पुख्ता किया जा सके।

कानपुर का यह मामला एक बार फिर ‘रईसजादों’ की बेलगाम ड्राइविंग और कानून को जेब में रखने वाली मानसिकता पर कड़ा प्रहार है।

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