बाराबंकी: पुलिस पिकेट के नजदीक अधिवक्ता की गोलियों से हत्या, 48 घंटे में गिरफ्तारी नहीं तो आंदोलन की चेतावनी
जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने पदाधिकारियों के साथ पुलिस अधीक्षक से मिलकर बदमाशों में गिरफ्तार करने की मांग की
बाराबंकी। असैनी मोड़ पर शुक्रवार दोपहर पुलिस पिकेट के पास अधिवक्ता शुऐब किदवई की दिनदहाड़े ताबड़तोड़ फायरिंग कर हत्या कर दी गई। दुस्साहस का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वारदात पुलिस पिकेट से चंद कदम की दूरी पर हुई। घटना से पूरे जनपद में सनसनी फैल गई है।

घटना के विरोध में जिला बार एसोसिएशन बाराबंकी ने आपात बैठक कर 48 घंटे के भीतर हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग की है। अध्यक्ष नरेंद्र वर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि तय समय सीमा में गिरफ्तारी नहीं हुई तो 16 फरवरी को बड़ा आंदोलन किया जाएगा। अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय से मिला और ज्ञापन सौंपकर शीघ्र खुलासे की मांग की। अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा, अन्यथा न्यायिक कार्य से विरत रहकर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

पोस्टमार्टम हाउस पर प्रदर्शन
शुक्रवार शाम को पोस्टमार्टम हाउस के बाहर साथी अधिवक्ताओं ने जोरदार हंगामा किया और तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। अधिवक्ताओं का कहना था कि जब पुलिस पिकेट के पास ऐसी घटना हो सकती है तो आमजन की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।
कार रोककर बरसाईं गोलियां
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, शुऐब की कार के आगे एक अन्य कार काफी देर से चल रही थी। असैनी मोड़ के पास वह कार अचानक धीमी हो गई, जिससे शुऐब को भी ब्रेक लगाना पड़ा। तभी पहले से घात लगाए बदमाशों ने उनकी कार पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। कार के शीशों पर गोलियों के निशान स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।

पुलिस के अनुसार करीब 15 राउंड फायरिंग हुई। एक गोली पेट में, एक आंख के पास तथा अन्य गोलियां शरीर में लगीं। पुलिस के पहुंचने तक शुऐब दम तोड़ चुके थे। उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
अतीत की चर्चा, वर्तमान में सक्रिय वकील
जानकारी के अनुसार, युवावस्था में शुऐब का नाम कुछ संगीन मामलों से जुड़ा रहा और एक समय उनका नाम बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी के गैंग से भी जोड़ा गया था। हालांकि बीते करीब डेढ़ दशक से उनके खिलाफ कोई नया मामला दर्ज नहीं हुआ था। साथी अधिवक्ताओं के मुताबिक, वे लंबे समय से सक्रिय रूप से वकालत कर रहे थे और लखनऊ से प्रतिदिन स्वयं कार चलाकर बाराबंकी कचहरी आते थे। उन्हें किसी प्रकार का प्रत्यक्ष खतरा नहीं था।

सदमे में परिजन
शुऐब किदवई बाराबंकी के सम्मानित परिवार से थे। उनके पिता स्व. महमूद नजीर किदवई मिलनसार व्यक्तित्व के लिए जाने जाते थे। बड़े भाई जावेद किदवई वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, जबकि छोटे भाई सुहैल विदेश में रहते हैं। परिवार में पत्नी और 14 वर्षीय पुत्र हैं। घटना से पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
बड़ा सवाल: पिकेट के पास वारदात, फरार कैसे हुए बदमाश ?
सबसे अहम सवाल यह है कि पुलिस पिकेट के पास इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देकर बदमाश कैसे फरार हो गए? पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और विभिन्न एंगल से जांच कर रही है। बार एसोसिएशन के 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद पुलिस पर अपराधियों की गिरफ्तारी का दबाव बढ़ गया है। अब नजर इस बात पर है कि पुलिस तय समय सीमा में इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा कर पाती है या नहीं।
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