Lucknow News: अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस पर SGPGI निदेशक ने साइकिल चलाकर बढ़ाया बच्चों का हौसला

Lucknow News: अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस (ICCD) के अवसर पर रविवार को राजधानी के एसजीपीजीआई परिसर में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम और साइकिल रैली का आयोजन किया गया। यह दिन उन बच्चों को समर्पित रहा जो कैंसर से लड़ रहे हैं और उन ‘सर्वाइवर्स’ के लिए जिन्होंने इस बीमारी को मात देकर नई जिंदगी की शुरुआत की है।

कार्यक्रम का सबसे प्रेरणादायक क्षण वह था जब पीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमन ने खुद साइकिल चलाकर रैली में हिस्सा लिया। औपचारिक ध्वजारोहण के साथ शुरू हुई यह रैली पीजीआई परिसर से होकर कैनकिड्स के समन्वय केंद्र पर समाप्त हुई। रैली में शामिल हर पैडल इस संदेश को आगे बढ़ा रहा था कि कैंसर का मतलब जिंदगी का अंत नहीं, बल्कि एक नए संघर्ष की शुरुआत है।

Lucknow News: अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस पर SGPGI निदेशक ने साइकिल चलाकर बढ़ाया बच्चों का हौसला

कैनकिड्स की सीनियर स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. योगिता भाटिया ने स्वागत भाषण में एक बहुत महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने बताया कि इलाज जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है इलाज के बाद की देखभाल (Survivorship Care)। उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि कैंसर को हराने के बाद ये बच्चे एक स्वस्थ, उत्पादक और सम्मानजनक जीवन जी सकें।” इस दौरान उन्होंने उन स्वास्थ्यकर्मियों और वॉलंटियर्स की भी सराहना की जो परिवारों को मानसिक और सामाजिक सहारा देते हैं।

संस्थान के डॉ. बसंत ने इस बात पर जोर दिया कि अगर बच्चों में कैंसर के लक्षणों की पहचान शुरुआती स्टेज में हो जाए और उन्हें सही समय पर रेफर किया जाए, तो जीवित रहने की दर (Survival Rate) में बहुत बड़ा सुधार लाया जा सकता है। उन्होंने समाज में कैंसर से जुड़ी भ्रांतियों और कलंक (Stigma) को दूर करने का आह्वान किया।

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निदेशक का संदेश, हर बच्चे को मिले खिलखिलाता भविष्य

निदेशक प्रो. आरके धीमन ने कहा कि एसजीपीजीआई उन्नत उपचार के साथ-साथ अब उन कार्यक्रमों पर भी ध्यान दे रहा है जो बच्चों के मनोवैज्ञानिक पुनर्वास, पोषण और शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करें। उन्होंने कैनकिड्स के साथ अपनी साझेदारी को दोहराते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य केवल बच्चों को बचाना नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर भविष्य देना है।

कार्यक्रम में एक खास सत्र उन बच्चों के लिए था जिन्होंने कैंसर को हरा दिया है। इन बच्चों की कहानियों ने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं और दिलों में उम्मीद जगा दी। उनकी दास्तां इस बात की गवाह बनी कि कैंसर अब लाइलाज नहीं है।

यह आयोजन इस संकल्प के साथ समाप्त हुआ कि बाल कैंसर के खिलाफ यह आंदोलन केवल एक दिन का नहीं, बल्कि तब तक जारी रहेगा जब तक हर पीड़ित बच्चे को सुलभ इलाज और खुशहाल भविष्य न मिल जाए।

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