Election Commission of India ने जारी की गुजरात की अंतिम मतदाता सूची, कांग्रेस ने कोर्ट में दी चुनौती

Sandesh Wahak Digital Desk: चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने मंगलवार को Gujarat की अंतिम वोटर लिस्ट जारी कर दी। साढ़े तीन महीने चले विशेष सुधार अभियान SIR के बाद अब राज्य में कुल 4,40,30,725 मतदाता दर्ज किए गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अनुसार 19 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट लिस्ट की तुलना में अब 5.60 लाख नए नाम जोड़े गए हैं।

मतदाताओं की संख्या में हुआ बदलाव

इस SIR अभियान से पहले राज्य में कुल 5.08 करोड़ मतदाता थे। जांच प्रक्रिया के दौरान करीब 74 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए थे। इसके कारण ड्राफ्ट सूची में मतदाताओं की संख्या घटकर 4.34 करोड़ रह गई थी। अब नए नाम जुड़ने के बाद कुल आंकड़ा बढ़कर 4.40 करोड़ हो गया है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने नागरिकों को दी बधाई

मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया के लिए 19 दिसंबर 2025 से 30 जनवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं। चुनाव अधिकारियों ने 10 फरवरी तक सभी मामलों का निपटारा कर लिया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी Harit Shukla ने इस प्रक्रिया में सहयोग देने के लिए नागरिकों को बधाई दी। इस अभियान को पूरा करने में 34 जिला चुनाव अधिकारी, 182 रजिस्ट्रेशन अधिकारी, 855 सहायक अधिकारी और 50,963 बूथ लेवल अधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने भी इस काम में योगदान दिया।

SIR अभियान के दौरान 5.08 करोड़ मतदाताओं को फॉर्म वितरित किए गए और उनका डिजिटलीकरण किया गया। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारियों और राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के बीच बैठकें भी आयोजित की गईं। जिन मतदाताओं के फॉर्म वापस नहीं मिले, उनकी सूची जिला चुनाव अधिकारियों और वेबसाइट पर भी जारी की गई।

SIR प्रक्रिया को अदालत में चुनौती

इस पूरी प्रक्रिया को Gujarat High Court में चुनौती दी गई है। Indian National Congress के दो नेताओं ने याचिका दाखिल कर SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता पंजीकरण नियम 1960 के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी Bharatiya Janata Party के कार्यकर्ताओं ने बिना दस्तावेजी प्रमाण के बड़ी संख्या में नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा किए। याचिका में यह भी कहा गया कि प्रभावित मतदाताओं को नोटिस दिए बिना या उनकी बात सुने बिना उनके नाम सूची से हटा दिए गए।

 

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