अमेरिका संग डील का असर: भारत की ओर लौटे विदेशी निवेशक, गोल्डमैन सैक्स ने बताई वजह

Impact of India US Trade Deal : भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील का असर अब साफ नजर आने लगा है। विदेशी निवेशक एक बार फिर भारतीय बाजार की ओर रुख कर रहे हैं और पिछले कुछ दिनों में दो अरब डॉलर से ज्यादा की पूंजी देश में आ चुकी है। ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है और आने वाले दिनों में यह रफ्तार और बढ़ सकती है।

अगर आप पिछले कुछ महीनों पर नजर डालें, तो सितंबर 2024 से भारतीय बाजार से विदेशी पैसा लगातार निकल रहा था। करीब 30 अरब डॉॉलर की बिकवाली हो चुकी थी। लेकिन जैसे ही ट्रेड डील की घोषणा हुई, माहौल बदल गया।

गोल्डमैन सैक्स के ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट सुनील कौल बताते हैं, “डील के ऐलान के बाद से अब तक कुल 2 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आ चुका है।” उनके मुताबिक रुपये की जो कमजोरी पिछले कुछ समय से देखी जा रही थी, उसका चरम अब खत्म हो गया है।

आखिर रुपया कमजोर क्यों था?

कौल ने समझाया कि रुपये में गिरावट के पीछे कई वजहें थीं। शुरुआत में रुपया थोड़ा ओवरवैल्यूड हो गया था। ऊपर से इक्विटी बाजार में निवेश घटा, सोने का आयात बढ़ा और व्यापार को लेकर अनिश्चितता का माहौल था। ऐसे में रुपये का कमजोर होना समझा जा सकता है। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।

अमेरिका-यूरोप के निवेशकों में दिखी दिलचस्पी

सुनील कौल का कहना है कि अमेरिका और यूरोप के बड़े निवेशकों में भारत को लेकर उत्साह साफ देखा जा रहा है। ट्रेड डील से पहले यह अनिश्चितता थी कि भारत और अमेरिका के रिश्ते आगे कैसे बढ़ेंगे। अब वह अनिश्चितता दूर हो गई है। कई विदेशी निवेशक इसे भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ी रुकावट मान रहे थे, जो अब हट चुकी है।

क्यों भारत बन रहा पसंदीदा विकल्प?

गोल्डमैन सैक्स का यह भी कहना है कि इस साल इमर्जिंग मार्केट्स यानी उभरते बाजारों में पैसा लगाने वाले फंड्स में अच्छा निवेश आया है। भारत को इसका फायदा मिल सकता है। इसके अलावा, अमेरिका और यूरोप में टेक्नोलॉजी शेयरों में जो उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, उससे बचने के लिए निवेशक अब घरेलू मांग पर चलने वाली अर्थव्यवस्थाओं की ओर देख रहे हैं और इसमें भारत सबसे आगे है।

ट्रेड डील से एक और फायदा यह हुआ है कि अब कम टैरिफ की वजह से भारत का निर्यात बढ़ने की उम्मीद है। वहीं दूसरी तरफ सस्ता रूसी तेल आयात होने से देश का बाहरी संतुलन (एक्सटर्नल बैलेंस) भी मजबूत हो रहा है, जिससे रुपये को और सपोर्ट मिलेगा।

बस इतना कहना चाहेंगे कि जो निवेशक पिछले कुछ महीनों में बाजार से दूर भाग रहे थे, वो अब वापस लौटने की तैयारी में हैं और इस बार उनके साथ एक नई उम्मीद भी है।

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