वोटर लिस्ट विवाद: चुनाव आयोग ने अखिलेश के दावों को नकारा, बताया क्यों कटे 4336 नाम?

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (UP SIR) को लेकर चल रही सियासी बयानबाजी पर अब विराम लगता दिख रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिनवा ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कर दिया कि फॉर्म-7 (नाम काटने के लिए भरा जाने वाला फॉर्म) के जरिए नाम कटने के आंकड़े उतने बड़े नहीं हैं, जितना दावा किया जा रहा है।

आंकड़ों की जुबानी: क्या है सच?

नवदीप रिनवा ने बताया कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि अब तक सूची से कुल 23,935 नाम हटाए गए हैं। इनमें से 14,388 नाम लोगों ने खुद फॉर्म भरकर हटवाए हैं (मृत्यु या दो जगह नाम होने की वजह से)। वहीं 5,211 लोगों ने दूसरी जगह शिफ्ट होने के कारण नाम कटवाए। जिस ‘फॉर्म-7’ को लेकर हंगामा है, उसके जरिए यानी दूसरों की आपत्ति पर अब तक केवल 4,336 नाम ही काटे गए हैं। वह भी पूरी जांच-पड़ताल के बाद।

अखिलेश यादव का आरोप

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा के इशारे पर दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों के नाम काटे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग पढ़-लिख नहीं सकते, उन्हें नोटिस भेजकर परेशान किया जा रहा है ताकि वे अपना काम छोड़कर दफ्तरों के चक्कर लगाते रहें। सपा का एक प्रतिनिधिमंडल इस मुद्दे पर चुनाव आयोग से मिलने की तैयारी में है।

“सपा फैला रही है अफवाह”

अखिलेश के आरोपों पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव केवल अफवाह फैला रहे हैं। मौर्य ने तंज कसते हुए कहा, “भाजपा कार्यकर्ता बूथ-बूथ जाकर मेहनत कर रहे हैं, लेकिन सपा के पास कार्यकर्ता नहीं बल्कि गुंडे-माफिया हैं। अब सपा का काम भाजपा तो नहीं करेगी।”

घर-घर जाकर होगी सुनवाई

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि जिन 2.22 करोड़ मतदाताओं के डेटा में कुछ विसंगतियां (गलतियां) मिली हैं, उनकी जांच के लिए बीएलओ (BLO) खुद उनके घर जाएंगे। अगर मतदाता घर पर नहीं मिलता है, तो परिवार का कोई भी सदस्य दस्तावेज जमा कर सकता है।

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