5 मई से CAA पर सुनवाई करेगा Supreme Court, 200 से अधिक याचिकाएं
Sandesh Wahak Digital Desk: Supreme Court ने गुरुवार को कहा कि वह इस साल 5 मई से Citizenship Amendment Act यानी CAA और उससे जुड़े Rules को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करेगा। Chief Justice of India सूर्यकांत, Justice Joymalya Bagchi और Justice Vipul M Pancholi की Bench ने वकीलों से पूछा कि अपनी दलीलें रखने में उन्हें कितना समय लगेगा।
Court ने आदेश दिया कि CAA 2019 को चुनौती देने वाले मामलों को दो Group में बांटा गया था, जिनमें Assam और Tripura से जुड़े मामले एक Group में और बाकी देश के मामले दूसरे Group में शामिल हैं। नियुक्त Nodal Lawyer पहले और दूसरे Group में आने वाले मामलों की पहचान करेंगे और दो हफ्ते के भीतर List Registry को सौंपेंगे। इसके बाद Registry इन मामलों को दो Category में बांटकर 5 मई 2026 से शुरू होने वाले हफ्ते में अंतिम सुनवाई के लिए List करेगी।
सुनवाई का पूरा शेड्यूल तय
Court के मुताबिक 5 मई को पहले आधे दिन में Petitioners की सुनवाई होगी। 6 मई को Petitioners के लिए दूसरा आधा हिस्सा तय किया गया है। 7 मई को आधा दिन Respondents के लिए रखा गया है और 12 मई को जवाब दिया जाएगा।
CAA को चुनौती देते हुए कुल 243 Petition फाइल की गई हैं। यह कानून 11 दिसंबर 2019 को Parliament से पारित हुआ था और उसी दिन President की मंजूरी भी मिल गई थी। उसी दिन IUML ने इस कानून को चुनौती देते हुए Supreme Court का रुख किया था। इसके बाद बड़ी संख्या में अन्य Petition भी दाखिल की गईं।
CAA और Rules का उद्देश्य
CAA और उससे जुड़े Rules का मकसद उन हिंदू, जैन, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी समुदाय के लोगों को नागरिकता देना है, जो 31 दिसंबर 2014 तक या उससे पहले Bangladesh, Pakistan और Afghanistan से भारत आए थे।
यह कानून Citizenship Act 1955 के Section 2 में संशोधन करता है, जो गैर कानूनी Migrants की परिभाषा तय करता है। इसके तहत Section 2(1)(b) में एक नया प्रावधान जोड़ा गया है।
किन्हें मिलेगा लाभ?
नए प्रावधान के अनुसार Afghanistan, Bangladesh या Pakistan से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय के लोग, जिन्हें Passport India Entry Act 1920 या Foreigners Act 1946 के तहत केंद्र सरकार ने छूट दी है, उन्हें गैर कानूनी प्रवासी नहीं माना जाएगा। ऐसे लोग Citizenship Act 1955 के तहत नागरिकता के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे।
हालांकि इस कानून में Muslim समुदाय को इस प्रावधान से बाहर रखा गया है। इसी वजह से देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और Supreme Court में कई याचिकाएं दायर की गईं।
भेदभाव का आरोप और Article 14 का मुद्दा
कानून को चुनौती देने वाले Petitioners का कहना है कि CAA धर्म के आधार पर Muslim समुदाय के साथ भेदभाव करता है। उनका तर्क है कि यह धार्मिक अलगाव बिना किसी उचित अंतर के किया गया है और यह Article 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
अंतरिम रोक से Court का इनकार
18 दिसंबर 2019 को Supreme Court ने इस मामले में Union of India को Notice जारी किया था, लेकिन कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था क्योंकि उस समय Rules अधिसूचित नहीं किए गए थे और Act लागू नहीं हुआ था।
इसके बाद 11 मार्च 2024 को केंद्र सरकार ने अचानक Rules अधिसूचित कर दिए, जिससे CAA लागू हो गया। इसके चलते Act और Rules पर रोक लगाने के लिए कई Application दायर की गईं। उसी महीने Supreme Court ने Citizenship Amendment Rules पर रोक लगाने की मांग पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा, लेकिन अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।

