घर के ठीक पास पब्लिक टॉयलेट पर Delhi High Court सख्त, कहा- ये जीने के अधिकार का उल्लंघन
Sandesh Wahak Digital Desk: दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने कहा है कि किसी व्यक्ति के घर के ठीक पास पब्लिक यूरिनल और खुला कूड़ेदान होना संविधान के तहत साफ और हेल्दी माहौल में सम्मान के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमित बंसल ने दिल्ली नगर निगम को चार हफ्ते के भीतर इन्हें हटाने का आदेश दिया। यहां जस्टिस अमित बंसल ने स्पष्ट कहा कि साफ सुथरा माहौल हेल्दी जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा है और हेल्दी माहौल की कमी सम्मान के साथ जीने के अधिकार को खत्म करती है।
वकील की याचिका पर हुई सुनवाई
दरअसल यह आदेश एक वकील की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में कहा गया था कि उसकी संपत्ति की पूर्वी दीवारों के पास बिना अनुमति के खुला कूड़ेदान और सार्वजनिक पेशाबघर बना दिया गया है। याचिकाकर्ता ने इस व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि यह उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
खुले कूड़ेदान से बदहाल हालात
याचिकाकर्ता ने बताया कि आसपास के लगभग 150 लोग अपने घर का कचरा उसी कूड़ेदान में फेंकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों से कई बार सफाई व्यवस्था बनाए रखने की मांग की गई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
नगर निगम की ओर से दावा किया गया कि सार्वजनिक शौचालय की नियमित सफाई की जा रही है। हालांकि अदालत (Delhi High Court) ने माना कि याचिकाकर्ता के अधिकारों के उल्लंघन को दूर करने के लिए ये उपाय पर्याप्त नहीं हैं।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि सार्वजनिक शौचालय और खुले कूड़ेदान के कारण आसपास बदबू फैलती है और लोग खराब हालात में रहने को मजबूर हैं। अदालत ने भी माना कि यह स्थिति परेशानी का कारण है।
निरीक्षण और अदालत का अंतिम आदेश
वहीं 7 अगस्त 2025 को किए गए एक संयुक्त निरीक्षण में यह पाया गया कि याचिकाकर्ता द्वारा सुझाई गई वैकल्पिक जगह संभव नहीं थी। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि इलाके के अधिकतर घरों में पहले से निजी टॉयलेट हैं और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के अनुसार कचरा सीधे घरों से एकत्रित किया जाना चाहिए, न कि खुले कूड़ेदान में छोड़ा जाना चाहिए।
आखिरकार अदालत (Delhi High Court) ने दिल्ली नगर निगम को याचिकाकर्ता के घर के पास बने खुले डस्टबिन और यूरिनल को तुरंत हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने माना कि खुले कूड़ेदान और पब्लिक यूरिनल का एक साथ होना बिना किसी संदेह के एक गंभीर परेशानी है और यह सम्मान के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन करता है।
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