‘अहंकारी कभी सनातनी नहीं हो सकता’, अखिलेश यादव का भाजपा पर बड़ा हमला
Sandesh Wahak Digital Desk: सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज भाजपा सरकार की घेराबंदी करते हुए धर्म, नैतिकता और शिक्षा के गिरते स्तर पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी के कथन को उद्धृत करते हुए कहा कि जिसमें नैतिकता नहीं, वह नेता कहलाने के लायक नहीं है।
‘अभिमान के नहीं होते कान’
अखिलेश यादव ने कहा कि शंकराचार्य जी का यह उपदेश कि ‘नेता वही जिसमें नीति हो और नीति उसी में होती है जिसमें नैतिकता होती है’, हर उस व्यक्ति के लिए दिशा-निर्देश है जो सत्ता के मद में चूर है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अभिमानी लोग कभी किसी की नहीं सुनते, और यही उनके पतन का कारण बनता है। इतिहास गवाह है कि धर्म और अहंकार की लड़ाई में अंततः अहंकार ही हारता है।” उन्होंने नया नारा देते हुए कहा “भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ।”
सरकारी स्कूलों को बंद करने पर घेरा
शिक्षा के मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए अखिलेश ने राज्यसभा के आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने कहा पिछले 5 वर्षों में देश भर में 18,727 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा चाहती है कि केवल अमीरों के बच्चे पढ़ें और पिछड़े, दलित व अल्पसंख्यक समाज (PDA) के बच्चे केवल मजदूर बनकर रह जाएं। स्कूल बंद होने से न केवल शिक्षा छिनी जा रही है, बल्कि बच्चों को मिलने वाला पोषण (मिड-डे मील) भी बंद हो रहा है, जो उनके मानसिक और शारीरिक विकास के लिए घातक है।
‘अगला चुनाव होगा शिक्षा पर’
अखिलेश यादव ने भविष्यवाणी की कि अगला चुनाव ऐतिहासिक होगा और ‘शिक्षा’ भाजपा की हार का सबसे बड़ा कारण बनेगी। उन्होंने कहा कि आज हर मां अपने बच्चे को पढ़ाना चाहती है, लेकिन भाजपा सरकारी तंत्र को खत्म कर प्राइवेट स्कूलों की लूट को बढ़ावा दे रही है। महंगाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बिजली-पानी, गैस और पेट्रोल के दाम बढ़ाकर भाजपा जनता की जेब काट रही है।
शिक्षकों का गिरता मनोबल
उन्होंने शिक्षकों की व्यथा साझा करते हुए कहा कि सरकार शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय दूसरे कामों में उलझा देती है, जिससे उनका मनोबल गिर रहा है। शिक्षामित्रों और विद्यालय कर्मचारियों की नाराजगी भी आने वाले चुनाव में भाजपा को भारी पड़ेगी। अंत में उन्होंने आह्वान किया कि ‘पीडीए पाठशाला’ आंदोलन को अब वास्तविक रूप देना होगा ताकि शोषित-वंचित समाज का भविष्य बचाया जा सके।
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