बरेली: कोतवाली आंवला में बिखरे हुए तीन परिवारों का हुआ ‘महामिलन’, होली से पहले घर लौटी खुशियां
बरेली। होली का त्योहार आने वाला है, लेकिन कुछ परिवारों के लिए यह त्योहार फीका पड़ने वाला था। आपसी विवादों के कारण एक-दूसरे से अलग रह रहे तीन परिवारों के लिए आज का दिन (बुधवार) नई शुरुआत लेकर आया। आंवला कोतवाली स्थित ‘परिवार परामर्श एवं मध्यस्थता केंद्र’ के सफल प्रयासों से आज तीन जोड़े फिर से एक-दूसरे का हाथ थामकर अपने घर लौटे।

इन परिवारों के बीच खत्म हुई दूरियां
काउंसलिंग के माध्यम से टीम ने तीन महत्वपूर्ण मामलों को सुलझाने में कामयाबी हासिल की।
विशाल और सोनल (ग्राम अतरछेडी)
गजाला और सलमान (ग्राम मनौना)
प्रीति और उनके परिजन (ग्राम चंजरी बालकिशन पुर) – विशेष रूप से दिव्यांग प्रीति के मामले में टीम ने संवेदनशीलता दिखाते हुए विवाद को खत्म कराया।
ये परिवार लंबे समय से आपसी मनमुटाव के कारण अलग-थलग पड़ गए थे, जिन्हें परामर्श केंद्र ने एक सूत्र में पिरो दिया।
11 महीनों में 120 परिवारों को बचाया
परामर्श केंद्र की यह उपलब्धि किसी रिकॉर्ड से कम नहीं है। अध्यक्ष जय गोविन्द सिंह और उनकी टीम ने महज 11 महीने की छोटी सी अवधि में अब तक 120 बिखरते परिवारों को टूटने से बचाया है। इस टीम में शामिल रमाकांत तिवारी, योगेश माहेश्वरी, रामदीन सागर, शोखी अग्रवाल, शोभना अग्रवाल, रजिया सुल्तान, सीमा रजा और महिला उपनिरीक्षक अंजू ने सामूहिक प्रयासों से काउंसलिंग कर इन रिश्तों को नई जिंदगी दी।
चारों तरफ हो रही है सराहना
टीम की इस शानदार कार्यशैली की प्रशंसा न केवल स्थानीय लोग बल्कि पुलिस के उच्चाधिकारी भी कर रहे हैं। इस सफलता के लिए टीम को ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ और ‘गणतंत्र दिवस’ के अवसर पर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है। हाल ही में समाजसेवी निहाल सिंह लोधी, मनौना धाम के प्रबंधक आर्येंद्र सिंह चौहान और महिला आयोग की सदस्य पुष्पा पाण्डेय ने भी टीम का नागरिक अभिनंदन कर उनका उत्साह बढ़ाया।
अध्यक्ष जय गोविन्द सिंह ने बताया कि उनका लक्ष्य कानूनी लड़ाई से पहले बातचीत के जरिए परिवारों को बचाना है, ताकि समाज में रिश्तों की गरिमा बनी रहे।
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