बटुक ब्राह्मणों के अपमान पर छिड़ा सियासी ‘वाकयुद्ध’, अखिलेश यादव की ब्रजेश पाठक को खुली चुनौती

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘चोटी (शिखा) कांड’ ने एक नया मोड़ ले लिया है। प्रयागराज में बटुक ब्राह्मणों के साथ पुलिस द्वारा की गई कथित बदसलूकी को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक आमने-सामने हैं। अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोलते हुए इसे ‘सनातन के रखवालों’ की सरकार में ब्राह्मणों का अपमान करार दिया है।

अखिलेश यादव का सीधा हमला

शनिवार को अखिलेश यादव ने ब्रजेश पाठक पर तंज कसते हुए कहा कि जब यह घटना हुई तब डिप्टी सीएम को ‘सांप सूंघ गया था’। उन्होंने कहा, “सनातन के रखवालों की सरकार में ब्राह्मणों की चुटिया खींची गई। अगर डिप्टी सीएम में हैसियत है, तो अपने समाज का सम्मान बचाएं। या तो सरकार गिराएं या फिर अपने पद से इस्तीफा दे दें।” अखिलेश ने यह भी जोड़ा कि विपक्षी दलों से गलती होने पर वे माफी मांगते हैं, लेकिन सरकार अपनी गलतियों पर पर्दा डाल रही है।

क्या था पूरा विवाद?

यह पूरा मामला 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ था। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती माघ मेले में संगम स्नान के लिए जा रहे थे। आरोप है कि पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में रोक दिया और उनके साथ आए बटुक ब्राह्मणों की शिखा (चोटी) पकड़कर उन्हें खींचा और पीटा। इस घटना का वीडियो और खबरें सामने आने के बाद ब्राह्मण समाज में भारी नाराजगी फैल गई थी।

ब्रजेश पाठक की ‘डैमेज कंट्रोल’ की कोशिश

मामले को बढ़ता देख डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने इसे ‘महापाप’ बताया था और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही थी। उन्होंने अपने सरकारी आवास पर 101 बटुक ब्राह्मणों को बुलाकर उनका तिलक लगाकर सम्मान किया और भोज कराया। ब्रजेश पाठक ने संदेश देने की कोशिश की कि वे और उनकी सरकार धार्मिक परंपराओं और ब्राह्मणों के सम्मान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

विपक्ष का पलटवार: “सम्मान से क्या होगा?”

सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि केवल घर बुलाकर सम्मानित करने से बटुकों का अपमान नहीं धुल जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ब्रजेश पाठक वास्तव में इस घटना से आहत हैं, तो वे सत्ता का मोह छोड़कर इस्तीफा क्यों नहीं देते?

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