राष्ट्रपति के अपमान पर केंद्र सख्त, गृह मंत्रालय ने बंगाल सरकार से मांगी रिपोर्ट
Sandesh Wahak Digital Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान स्वागत में हुई कथित कोताही पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच तलवारें खिंच गई हैं। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को कड़ा पत्र लिखकर आज शाम 5 बजे तक पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
3 सवालों के घेरे में है ममता सरकार
गृह मंत्रालय ने मुख्य सचिव से मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जवाब मांगा है।
प्रोटोकॉल का उल्लंघन: राष्ट्रपति के आगमन पर उनके स्वागत के लिए मुख्यमंत्री या किसी वरिष्ठ मंत्री की मौजूदगी क्यों नहीं थी?
जगह में बदलाव: दार्जिलिंग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन का स्थान ऐन वक्त पर क्यों बदला गया?
सुरक्षा में चूक: कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में जो कमियां पाई गईं, उनका जिम्मेदार कौन है?
मुझे आदिवासी और भारतीय होने पर हमेशा गर्व रहा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के इस शर्मनाक कृत्य ने मेरे गौरव को ठेस पहुँचाई है। भारत की राष्ट्रपति पद पर बैठी आदिवासी महिला आदरणीय द्रौपदी मुर्मू जी का अपमान करना आदिवासी गौरव का अपमान और भारत के संविधान पर आक्रमण है। pic.twitter.com/55uZRRpZ2H
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) March 7, 2026
यह पूरा विवाद शनिवार (7 मार्च) को उस समय शुरू हुआ जब सिलीगुड़ी के पास संथाल सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति खुद भावुक हो गईं। उन्होंने खुले मंच से अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें रिसीव करने के लिए सरकार का कोई बड़ा चेहरा मौजूद नहीं था। उन्होंने कार्यक्रम स्थल को बिधाननगर से बदलकर गोसाईंपुर किए जाने पर भी नाराजगी जताई और कहा कि इससे आदिवासी समुदाय के लोगों को पहुंचने में काफी परेशानी हुई।
इस मुद्दे पर देश की राजनीति गरमा गई है। पीएम ने इस घटना को अभूतपूर्व और शर्मनाक करार देते हुए कहा कि ममता सरकार ने संवैधानिक मर्यादाओं की सारी सीमाएं लांघ दी हैं। वहीं मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को भाजपा के इशारे पर राजनीति में घसीटा जा रहा है। ममता ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने तय लाइन-अप का पालन किया था और वह खुद उस समय कोलकाता में मतदाता सूची के मुद्दे पर धरने पर थीं।
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