वाराणसी पुलिस का बड़ा एक्शन, बंगाल से दबोचे गए ‘डिजिटल डकैत’
Sandesh Wahak Digital Desk: वाराणसी पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो ‘एसएमएस फार्वर्डर’ (SMS Forwarder) ऐप के जरिए लोगों की मेहनत की कमाई पर डाका डाल रहा था। पुलिस ने इस गिरोह के सरगना समेत दो सदस्यों को पश्चिम बंगाल के अण्डाल रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया है।
कैसे शुरू हुई जांच?
यह पूरा मामला 5 जनवरी 2026 को सामने आया था। रामनगर के मछरहट्टा बाजार के व्यवसायी अनूप गुप्ता के बैंक खाते से साइबर ठगों ने चालाकी से 8,38,402 रुपये पार कर दिए थे। शिकायत मिलते ही पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल के निर्देश पर एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा करते हुए बंगाल में दबिश दी।

ठगी का हाईटेक तरीका: एक ऐप और सब खत्म
पूछताछ में आरोपियों ने ठगी का जो तरीका बताया, वह किसी को भी हैरान कर सकता है। ये ठग इस तरह जाल बिछाते थे। अपराधी आरटीओ चालान या बैंक अपडेट के नाम पर फर्जी डिजिटल पोस्टर (फ्लायर) भेजते थे।
इस पोस्टर के साथ एक ऐप लिंक होता था। जैसे ही कोई इसे डाउनलोड करता, यह ‘ट्रोजन ऐप’ पीड़ित के मोबाइल का पूरा कंट्रोल अपराधियों को दे देता। यह ऐप मोबाइल पर आने वाले सभी ओटीपी (OTP) और मैसेज गुप्त रूप से ठगों को भेजने लगता। पीड़ित को शक न हो, इसलिए ये ‘एसएमएस बॉम्बर’ का इस्तेमाल कर फोन पर सैकड़ों फालतू मैसेज भेज देते थे, ताकि बैंक का मैसेज दिखाई न दे और इसी बीच वे खाता साफ कर देते।
जामताड़ा से जुड़ा है कनेक्शन
पकड़े गए आरोपियों की पहचान नागेश्वर मंडल और अक्षय मंडल के रूप में हुई है। ये दोनों मूल रूप से झारखंड के जामताड़ा के रहने वाले हैं, जो देश में साइबर ठगी का सबसे बड़ा गढ़ माना जाता है। नागेश्वर मंडल पहले भी ठगी के मामलों में वांछित रह चुका है।
बरामदगी और पुलिस की अपील
पुलिस ने इनके पास से ठगी के 1.5 लाख रुपये नकद और कई महंगे मोबाइल फोन बरामद किए हैं। एसीपी क्राइम विदुष सक्सेना ने जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक या एपीके (APK) फाइल को डाउनलोड न करें, क्योंकि यह आपके मोबाइल का कंट्रोल छीन सकता है।
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