अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बड़ा एलान, बनेगी ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना’, बोले- धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र…
Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी लखनऊ में ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ का शंखनाद करते हुए ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सनातन धर्म और गो माता की रक्षा के लिए कड़े रुख का संकेत दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब धार्मिक समाज में ‘धर्मनिरपेक्ष शपथ’ नहीं बल्कि ‘धर्म की शपथ’ चलेगी।
‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना’ का गठन
शंकराचार्य ने घोषणा की कि वे अपनी एक अलग सेना बनाएंगे, जिसका नाम ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना’ होगा। उन्होंने अखाड़ा परिषद के कुछ संतों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब अखाड़े ही शंकराचार्य के साथ खड़े होने के बजाय सत्ता (मुख्यमंत्री) के साथ खड़े हैं, तो उन्हें अपनी अलग व्यवस्था बनानी होगी। यह सेना संत समाज में व्याप्त अशास्त्रीयता और अधर्म को दूर करने का कार्य करेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि परिस्थितियां बनीं, तो धर्म की रक्षा हेतु शस्त्र उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
समग्र गविष्ठि गोयुद्ध यात्रा: गोरखपुर से शंखनाद
शंकराचार्य ने आंदोलन को और तेज करने के लिए नई समग्र गविष्ठि गोयुद्ध यात्रा की घोषणा की है। यात्रा 3 मई से शुरु होकर 23 जुलाई 2026 तक चलेगी। यह यात्रा गोरखपुर से प्रारंभ होगी और पूरे उत्तर प्रदेश का भ्रमण कर गोरखपुर में ही संपन्न होगी। 24 जुलाई को पुन: लखनऊ के कांशीराम स्मृति स्थल पर एक विशाल जनसभा का आयोजन किया जाएगा।
“सनातन की सुप्रीम कोर्ट हैं शंकराचार्य”
अपने संबोधन में शंकराचार्य ने कई महत्वपूर्ण और तीखे बिंदु रखे। प्रयागराज माघ मेले में वेद पढ़ने वाले बटुकों के साथ हुए दुर्व्यवहार का जिक्र करते हुए उन्होंने पुलिस और प्रशासन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसी संन्यासी या योगी का चरित्र दोहरा नहीं हो सकता। उन्होंने जनता को आगाह किया कि गो हत्या करने वाला कसाई ही नहीं, बल्कि इसकी अनुमति देने वाला और इस पर मौन रहने वाला भी समान रूप से पापी है। उन्होंने घोषणा की कि सनातन धर्म के लिए शंकराचार्य ही ‘सुप्रीम कोर्ट’ के समान हैं।
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